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एमआरआई मशीन मिलने की घोषणा के बाद भी स्थापना नहीं

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तीन साल से एमआरआई मशीन का इंतजार
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बस्ती। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय, कैली में तीन साल से एमआरआई मशीन का इंतजार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने से पहले ही 2018 में इस अस्पताल में ही एमआरआई मशीन मिलनी थी। इस नाते यहां करोड़ों रुपये खर्च कर भवन निर्माण कराया गया, मगर तीन साल बाद भी एमआरआई मशीन नहीं मिल सकी। लिहाजा मरीज इस सुविधा से वंचित होने को मजबूर हैं।
गत 27 अप्रैल 2022 को शासन ने जिले को एमआरआई मशीन दिए जाने की घोषणा कर दी है, मगर बीस दिन बाद भी मशीन का कहीं अता पता नहीं। जिले में 2018 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को हरी झंडी मिली और यह कॉलेज बनकर तैयार हो गया। 2019 से यह संचालित भी किया जा रहा है। अभी तीन साल से संचालित मेडिकल कॉलेज ने ओपेक चिकित्सालय कैली को ओपीडी तथा अन्य चिकित्सा सेवा के लिए संबद्ध कर लिया है। संबद्धीकरण के बाद यह तय हुआ था कि यहां विभिन्न उपकरण जो बंद हैं, उन्हें पीपीपी मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत कैली में डायलिसिस संचालित हो रही है। पूर्ण रूप से सफल इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पीपीपी माडल से एमआरआई लगवाकर उसे संचालित करने की योजना बनाई थी, करोड़ों रुपये के भवन बनाकर 2018 में ही तैयार कर दिए गए, मगर तीन वर्ष बाद भी यहां मशीन स्थापित नहीं हो सकी। अब मशीन दिए जाने की घोषणा के बाद इसके संचालन की व्यवस्था चिकित्सा शिक्षा विभाग के जिम्मे होगी। उत्तर प्रदेश सप्लाई कारपोरेशन इस मशीन को मुहैया कराएगा।
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बोले प्राचार्य
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि एमआरआई मशीन की स्थापना का प्रस्ताव मेडिकल एजूकेशन को भेजा गया है। उनकी स्वीकृति भी मिल गई है। एमआरआई मशीन के लिए धन स्वीकृत किया जा चुका है। प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द से जल्द ओपेक चिकित्सालय कैली में एमआरआई मशीन की स्थापना होगी। इसे भी शासन के निर्देश के क्रम में व्यवस्थागत ढंग से संचालित किया जाएगा।
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निजी सेंटरों पर तीन से चार हजार रुपये की जांच
जिले के कुछ गिने चुने सेंटरों पर ही एमआरआई जांच हो सकती है। इसके लिए करीब तीन से चार हजार रुपये शुल्क लिया जाता है। कैली में मशीन स्थापना से मरीजों को कम खर्च में बेहतर जांच की सुविधा मिलेगी।
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