साल भर में मिर्च-मसालों के दाम में डेढ़ गुना उछाल
बस्ती। खाने की थाली में स्वाद के लिए मिर्च मसाला का बड़ा महत्व होता है। मसालों के दाम में उछाल के कारण खाने का स्वाद फीका हो गया है। महज एक साल के अंदर मसालों के दाम ने डेढ़ से दोगुने का अंतर आ गया है। जिसके कारण आम आदमी परेशान हो गया है। बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। खाद्य तेल और आटा-दाल के साथ ही मसालों पर भी महंगाई की मार पड़ने लगी है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले मसालों की कीमत सातवें आसमान पर पहुंच गई है।
वहीं, गर्म मसाला 400 रुपये मंहगा हो गया है। सबसे ज्यादा तेजी जावित्री पर है जो जिसकी कीमत में छह सौ रुपये किलो वृद्धि हुई है। इसके अलावा कालीमिर्च और लौंग की कीमत में 200 तो जीरा 80 रुपये की उछाल है।
मसाले पहले, अब
काली मिर्च, 800 - 1000
छोटी इलायची 4000 - 5000
बड़ी इलायची 2200- 2500
जायफल 900 -1000
जीरा 270 - 350
तेजपत्ता 70 80
लाल मिर्च 260 - 280
बड़ी हल्दी 70 120
( कीमत प्रति किलोग्राम )
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जमाखोरों की वजह से मसालों के दामों में इतनी तेजी आई है। अगर सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ाई करे तो दाम कम हो जाएंगे। जो काली मिर्च पहले 800 रुपये प्रति किलो मिल रही थी उसकी कीमत बढ़कर 1000 रुपये किलो हो गई है। इसी तरह 4000 रुपये किलो मिल रही छोटी इलायची की कीमत 5000 रुपये किलो पहुंच गई है।
गांधीनगर के मसाला विक्रेता छोटेलाल
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किचन में बनने वाली सब्जी की महक कम हो गई है। मसालों के दाम बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। इसलिए अब इनका उपयोग काफी संभालकर करना पड़ता है। जिसके कारण स्वाद और महक में फर्क आ गया है।
प्रीति यादव, आवास विकास कालोनी
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खाने के साथ सब्जी की जरूरत होती है। सब्जी बिना मसाले के नहीं बनती लेकिन यह इतनी मंहगी हो गयी है कि खरीदने के लिए सोचना पड़ता है।
रेशमा बानो, पुरानी बस्ती
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सभी चीज मंहगी होती चली जा रही है। जिसके कारण रसोई का बजट बढ़ गया है। सरकार महंगाई पर रोक लगाने के लिए काई ठोस कदम उठाने की जरूरत है जिससे लोगों को रहत मिले।
कविता रामेश्वरपुरी, गांधीनगर