सराफा कारोबार में एक्साइज ड्यूटी हटाने की मांग को लेकर जिले में सोमवार को व्यापारियों के बंद का मिला-जुला असर दिखा। नगर में आधा दिन तक ही सभी दुकानें बंद रहीं। व्यापारियों के मुताबिक बंदी से जिले में करीब दो करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह के समय जिले के विभिन्न कस्बों में दुकानें बंद रही हैं। लेकिन दोपहर बाद धीरे-धीरे खुल गईं। इस दौरान व्यापारी संगठनों ने दुकानें बंद करने की अपील की जिसका विशेष प्रभाव देखने को नहीं मिला। उप्र सराफा एवं स्वर्ण व्यवसायी संघ के जिलाध्यक्ष कुंदनलाल वर्मा ने बताया कि उप्र व्यापार प्रतिनिधि मंडल, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंच, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल और आटो यूनियन ने बंदी को समर्थन दिया।
इन संगठनों के सहयोग से ही बंदी सफल रही। सराफ व्यवसायी पिछले 36 दिन से हड़ताल पर है और केंद्र सरकार को जरा सी भी फिक्र नहीं हैं। हड़ताल का सबसे अधिक प्रभाव कारीगरों और सेल्स का कार्य करने वाले कर्मियों पर पड़ रहा है। इन लोगों के परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। अगर केंद्र ने इन लोगों की मांगे नहीं मानी तो सराफा व्यापारी उग्र होने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
सोमवार की बंदी से करीब दो करोड़ कारोबार प्रभावित हुआ है।
इस दौरान विश्वनाथ वर्मा, पवन वर्मा, मनोज, रामकृष्ण, जगदंबा, अष्टभुजा, सपन, शिवकुमार, अंशू, संजय, राजेंद्र, सूर्यलाल, बीरबल, रमेश, जय गुप्त, डब्बू, विवेक, हरिशंकर, अभिषेक, मोहन, ओमप्रकाश, मणिनाथ सहित अन्य शामिल रहे।