जिले में खिसका भाजपा का जनाधार, वोट प्रतिशत दिखा रहा आइना
बस्ती। पूर्वांचल के अहम जिलों में शुमार बस्ती जिले में विपक्षी दल भाजपा के जनाधार में सेंध लगाने में कामयाब तो रहे ही, भाजपा के विजय रथ को इस कदर रोका कि उसे पांच में से चार सीटें गंवानी पड़ीं। इसके पीछे भीतरघात, कार्यकर्ताओं की नाराजगी जैसी तमाम वजहें हो सकती हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव के परिणाम ने भाजपा के लिए 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ इसी साल होने वाले पंचायत चुनाव के लिए चुनौती बढ़ा दी है।
2017 के विधानसभा चुनाव भाजपा को मिली पांचों सीटों ने ऐसी संजीवनी दी कि उसका विजय पताका नगर पालिका चुनाव से लेकर पंचायत चुनाव तक में फहरता रहा। लगातार मिल रही कामयाबी से पार्टी के दिग्गज नेताओं का आत्मविश्वास से लवरेज होना स्वाभाविक था, लेकिन विधानसभा चुनाव से ऐन पहले वह वोटों में लग रही सेंध को नहीं देख पाए। जिसका नतीजा अब चार विधानसभा सीटों पर मिली हार के रूप में सामने है। पिछले चुनाव में मिले मतों की तुलना करें तो साफ दिखेगा कि पार्टी नेता जिले में बह रही सियासी हवा का रुख भांपने में या तो नाकाम रहे या फिर मोदी-योगी के फैक्टर के आगे अति आत्मविश्वास में उसकी अनदेखी करते गए। यही वजह रही कि रुधौली में पिछले चुनाव के मुकाबले भाजपा को 10.61 फीसदी कम वोट मिले। जबकि, बस्ती सदर विधानसभा क्षेत्र में 6.14 प्रतिशत, हर्रैया में 5.83 प्रतिशत, महादेवा सुरक्षित में 4.95 प्रतिशत, जबकि कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र में 2.94 प्रतिशत कम वोट मिले। इस खिसके जनाधार के बीच एकमात्र हर्रैया के भाजपा प्रत्याशी अजय सिंह ही रहे, जो तमाम उलझे राजनीतिक समीकरणों के बाद भी जीत का परचम लहराने में न सिर्फ कामयाब रहे, भाजपा को बस्ती से क्लीन स्विप होने से भी बचा लिया।
रुधौली में आम आदमी पार्टी ने बिगाड़ी भाजपा की गणित
विधानसभा चुनाव में पहली बार आम आदमी पार्टी ने भी उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, यहां वह कोई करिश्मा दिखाने में नाकाम रही, लेकिन रुधौली आम आदमी पार्टी ने जीत का समीकरण ही बिगाड़ दिया। यहां से आम आदमी पार्टी ने पुष्करादित्य सिंह को मैदान में उतारा था। कद्दावर सियासी पृष्ठभूमि से आने वाले पुष्करादित्य को विधानसभा चुनाव में 10.43 प्रतिशत वोट मिले। जबकि, रुधौली में भाजपा को 10.61 प्रतिशत कम वोट मिले। ऐसे में साफ है कि यहां भाजपा की हार में जहां सपा की मजबूती मायने रखती है, वहीं आम आदमी पार्टी ने रही सही कसर पूरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
वोटों के ध्रुवीकरण से आए चौकाने वाले नतीजे
भाजपा इस चुनाव में परिवारवाद, विकासवाद, सुदृढ़ कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे के मद्देनजर चुनाव मैदान में थी। उसका असर प्रदेश में एक बार फिर दो तिहाई बहुमत से सरकार में वापसी के रूप में दिख भी रहा है। वहीं, दावा किया जा रहा था कि काम के बूते भाजपा बस्ती में एक बार फिर 2017 का इतिहास दोहराने में कामयाब होगी, लेकिन धर्म-जाति के आधार पर हुए वोटों के ध्रुवीकरण से नतीजे को भाजपा के पक्ष में जाने से रोक दिया। यही मुख्य कारण रहा कि चौंकाने वाले नतीजे आए।
2022 के विधानसभा चुनाव में दलों को मिले वोट प्रतिशत
दल- बस्ती सदर हर्रैया कप्तानगंज महादेवा सुरक्षित, रुधौली
सपा- 39.81 31.57 43.66 39.47 36.82
भाजपा- 38.99 39.85 32.46 36.87 30.33
बसपा- 16.86 25.16 18.70 19.04 16.04
कांग्रेस, 1.9 0.91 1.63 1.07 1.90
आप 0.23, 0.19 0.27 0.56 10.43
2017 के विधानसभा चुनाव में दलों को मिले वोट प्रतिशत
दल बस्ती सदर हर्रैया कप्तानगंज महादेवा सुरक्षित रुधौली
भाजपा 45.13 45.68 35.40 40.82 40.94
सपा-कांग्रेस गठबंधन 24.39, 31.51, 30.19 24.31 23.48
बसपा, 24.12, 18.72, 31.97, 28.69, 31.05