दो साल से फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल, वही कर रहे इलाज
वाल्टरगंज/बस्ती। सुबह 10:20 बजे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वाल्टरगंज में एक महिला से झाड़ू लगवाते दिखे एक शख्स दिखे। पूछने पर पता चला कि वह अस्पताल के फार्मासिस्ट करुणेश दुबे हैं। तभी परिसर में इंतजार कर रहे 14 वर्षीय अनीश निवासी महदेव उनके पास आते हैं। आंख में जलन व गिल्टी की समस्या उन्हें बताते हैं। सफाई करा लेने के बाद फार्मासिस्ट ओपीडी में आते हैं और स्वयं जाकर मरीज का पर्चा बनाकर उनसे बीमारी के बारे में पूछते हैं और पर्चा लिखने के बाद दवा काउंटर से दवा भी दी। कुछ ऐसा ही नजारा पिछले दो साल से इस अस्पताल का है। यहां दो साल से डाक्टर नहीं हैं। फार्मासिस्ट ही लोगों का उपचार कर दवाएं देते हैं।
वाल्टरगंज क्षेत्र की आबादी लगभग सात हजार है। जिनके इलाज का जिम्मा इसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर है। पड़ताल में पता चला कि प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत कुमार कुशवाहा कोरोना की पहली लहर के दौरान कोविड कंट्रोल रूम से संबद्ध हो गए थे। तभी से वह यहां नहीं आए। फार्मासिस्ट करुणेश दुबे ने बताते हैं कि जिस दिन उनकी भी ड्यूटी वैक्सिनेशन में लगती है उस दिन यहां पर स्टाफ न होने के कारण ताला लगाकर अस्पताल बंद करना पड़ता है। बताया कि चार अप्रैल को भरौली बाबू व आठ अप्रैल को तेलियाजोत में वैक्सीनेशन ड्यूटी के कारण अस्पताल बंद करना पड़ा था। आज भी अकेले होने के कारण हमें ही सफाई कार्य तक कराना पड़ रहा है।
फार्मासिस्ट ने बताया कि वार्ड ब्यॉय मनोज कुमार, एलए अश्वनी सिंह की ड्यूटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरवटिया में लगी रहने के कारण यहां नहीं आ पाते हैं। इसी बीच 10: 27 बजे एएनएम काजल सिंह ने पहुंचकर उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर किया। बताया कि ड्यूटी वैक्सीनेशन में श्रीपालपुर में लगी है। लेकिन, अभी तक वैक्सीन ही नहीं आई। इसीलिए वह अस्पताल आकर वैक्सीन आने का इंतजार कर रही हैं। जबकि 10:35 बजे तक बीएचडब्ल्यू अमन श्रीवास्तव भी नहीं पहुंचे थे।
अस्पताल में डाक्टर नहीं मिलते हैं। फार्मासिस्ट ही दवा आदि देते हैं। गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल तक की दौड़ लगानी पड़ती है या फिर निजी चिकित्सक के यहां जाना पड़ता है।
मनोज राजभर, निवासी वाल्टरगंज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरविटया यहां से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर है। ऐसे में हम सभी के लिए जिला अस्पताल ही सुविधा जनक होता है। अगर यहां चिकित्सक हों तो हमे परेशान नहीं होना पड़ेगा।
राकेश राजभर, निवासी वाल्टरगंज
सरकारी अस्पताल होने के बाद भी यहां कोई सुविधा नहीं है। जांच आदि के लिए प्राइवेट अस्पताल ही एकमात्र सहारा होते हैं। गंभीर मामलों में लोगों को उपचार के काफी समस्या झेलनी पड़ती है।
वैद्यनाथ, वाल्टरगंज
बदहाल है अस्पताल
अस्पताल में चिकित्सक न होने के साथ यहां की स्थिति भी बदहाल है। परिसर में गंदगी है। गेट पर ही सीमेंट व अन्य सामान रखा हुआ है। साथ ही बरामदे में टूटी-फूटी कुर्सियां व अन्य कबाड़ यहां दुर्दशा को बयां करने को काफी है।
मेरी ड्यूटी कोरोना के दृष्टिगत मार्च 2020 से ही अरबन नोडल अधिकारी के रूप में लगी है। इसलिए कभी-कभार ही अस्पताल जाना हो पाता है।
-डॉ. अजीत कुमार कुशवाहा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, वाल्टरगंज पर जल्द ही किसी चिकित्सक की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा अन्य दिक्कतों को भी दूर कराया जाएगा।
-डॉ. चंद्रशेखर, सीएमओ, बस्ती