प्राथमिक विद्यालय गांधीनगर के भवन को ध्वस्त करने के बाद छोड़ दिया गया शेष हिस्सा।
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भवन को ध्वस्त कराकर भूल गए जिम्मेदार
बस्ती। परिषदीय स्कूलों के भवन को ध्वस्त कराकर भूल गए जिम्मेदार । जिले में परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवनों को शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन नीलाम करा कर गिरवा रहा है। लेकिन पुन: निर्माण के लिए शासन से पैसा नहीं मिल रहा है। इसके चलते इन भवनों को पुन: निर्माण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में कई स्कूलों के बच्चे या तो एक कमरे मे पढ़ रहे है या बगल के स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं। शासन ने जर्जर स्कूल भवनों को गिराने के निर्देश वर्ष 2020 में दिए थे। जिले में 394 स्कूली भवनों को जर्जर पाया गया। जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें गिरवाना शुरू कर दिया है। अब तक 298 स्कूल भवनों को नीलामी करके गिराया जा चुका है।लेकिन 96 स्कूलों के भवन अभी जर्जर अवस्था में खड़े है। इन भवनो के निलामी नही हो सकी है। इसके बाद भी शासन स्तर से स्कूल भवन के पुन: निर्माण के लिए धनराशि जारी नहीं की गई है, जिसके चलते संबंधित स्कूलों के नवीन भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है। जिन जर्जर स्कूल भवनों को गिराया गया है, वहां के स्टाफ और बच्चों को नजदीकी स्कूलों में भेज दिया गया है। या वहा के सभी कक्षाएं एक कमरे में चल रही है। दूसरी तरफ खाली जमीन को देखने वाला कोई नहीं है, स्कूल के बगल के लोग विद्यालय की जमीन पर कब्जा करने की फिराक में हैं। कई जगह लोगों ने स्कूलों की जगह में अस्थाई रूप से सामान रख लिया है।
बीएसए जगदीश शुक्ला ने बताया कि जर्जर भवनों को शासन और विभागीय आदेश पर नीलाम किया गया है। पिछले दो साल में करीब298 भवनों की नीलामी हो चुकी और उसको ध्वस्त किया जा चुकहा है। 96 विद्वालय के भवनो को जो मूल्य उस पर निलामी नही हो पायी । जिसके कारण फिर से निलामी की प्रतिक्रिया चल रही है। सभी बीईओ से अतिरिक्त कक्षाएं बनाने के लिए प्रस्ताव मांगा गया है। शासन से 40 विद्वालय में अतिरिक्त कक्षाएं बनाने के लिए संतुष्टि मिल गयी है। बाकी भवनो के निर्माण को लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जायेगा।