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सरयू उफान: खतरे के निशान पर पहुंचने से दहशत

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विक्रमजोत क्षेत्र मे सरयू का जल स्तर बढ़ा। - फोटो : BASTI
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सरयू के खतरे के निशान पर पहुंचने से दहशत
तटीय गांवों की जमीन काट रही, आज शाम तक और बढ़ सकता है जलस्तर
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से सरयू के उफान से तबाही के संकेत मिलने लगे हैं। तटवर्ती ग्रामीणों की खेती योग्य जमीन लगातार धारा काट रही है। गांवों के साथ ही 300 मीटर दूर फोरलेन को खतरा पैदा हो सकता है।
मंगलवार को सरयू नदी का प्रवाह 92.400 मीटर पर पहुंच गया जो कि खतरे के निशान 92.730 मीटर से महज 33 सेंटीमीटर नीचे है। अयोध्या स्थित केंद्रीय जल आयोग की माने तो अपस्ट्रीम में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर हो गया है। इसके चलते अभी अयोध्या में यह जलस्तर और बढ़ेगा। बढ़ रहे जलस्तर से आसपास के ग्रामीणों में दहशत है। यदि जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में तटीय क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या खड़ी हो जाएगी। वहीं नदी की धारा में तीव्रता के चलते लगातार किनारों पर कटान करती हुई नदी तबाही मचाने पर तुल गई है। केशवपुर, रानीपुर, बाघानाला, भरथापुर, कल्यानपुर, चांनपुर, सहजौरा, संदलपुर समेत कई जगहों पर भीषण कटान शुरू हुई है। केशवपुर के पास तो अयोध्या से सीधे सरयू की धारा आकर टकराती है जहां खेतों को काटकर नदी में मिला रही है। बाघानाला, भरथापुर में लगातार नदी कटान करती हुई आबादी से सटने लगी है। कल्यानपुर में नदी कटान करते हुए आबादी से 10 मीटर दूर रह गई है। कल्यानपुर के मंगल प्रसाद, हृदय राम, सुशील कुमार, अभिषेक शर्मा, राजबहादुर, हेमंत कुमार पांडेय, कमलाकांत, दयावती, संगीता आदि का कहना है कि अब तो सिर्फ भगवान के सहारे ही हम लोगों का घर परिवार है।
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तटबंध पर बढ़ा नदी का दबाव
दुबौलिया। सरयू नदी जलस्तर बढ़ने के साथ किसानों के खेतों को अपने आगोश में ले रही है। कटान थमने का नाम नहीं ले रही है ऐसे में जहां तटबंध पर भारी दबाव बन गया है, वहीं, कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। क्षेत्र के कटरिया-चांदपुर तटबंध पर दबाव बना हुआ है। कटरिया, खजांचीपुर, विशुनदास पुर, भिउरा, मझियार, भनखरपुर, दिलासपुरा, टकटकवा, पहड़वापुर में कृषि योग्य भूमि लगातार कट रही है। जलस्तर बढ़ने से टकटकवा, दिलाशपुर, विशुनदासपुर का पुरवा, सुविखाबाबू, भुवरिया, अशोक पुर आदि पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ खंड तटबंधों के कमजोर स्थानों पर मरम्मत कार्य करा रहा है। जलस्तर बढ़ने से बोरियों का बेस डूबने लगा है। अधिशासी अभियंता दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है। जलस्तर बढ़ने से दबाव बढ़ा है लेकिन खतरे की कोई बात नहीं है।
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सरयू ने पांच साल में बना दिया भूमिहीन
आधा दर्जन गांवों का वजूद भी खत्म, कई हैं कगार पर
आठ किमी दूर थी नदी अब तटबंध से सटकर बह रही
आनंद शुक्ला
दुबौलिया। माझा इलाके में सरयू नदी ने ऐसा कहर बरपाया कि पांच साल में भौगोलिक नक्शा ही बदल गया। आधा दर्जन गांवों का वजूद खत्म हो गया तो एक दर्जन से अधिक गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। खेतिहर किसान भूमिहीन हो चुके हैं।
पांच साल पहले सरयू नदी तटबंध से आठ किलोमीटर दूर बहती थी पर लगातार कटान से नजदीक पहुंची नदी से अब तटबंध पर ही संकट खडा हो गया। कृषि योग्य भूमि धारा में समा जाने से तटवर्ती किसान भूमि हीन हो गए। अब न तो रहने के लिए कोई स्थायी जगह और खेती करने के लिए जमीन ही बची। नदी अपने पीछे जो जमीन छोड़ी भी उस पर अब रेत पानी और झाड़ झंखाड़ है। कई किसान ऐसे जो कभी 100 बीघे के काश्तकार थे। उन्हीं किसानों में दिलाशपुरा के धीरेंद्र सिंह बताते हैं कि 90 बीघा खेत नदी में गया। अपने आशियाने पर खुद हथौड़ा चलाना पड़ा। मुआवजे के नाम पर कुछ भी नहीं मिला। परिवार के भरण-पोषण पर ही संकट खड़ा हो रहा है।
जयराम कहते हैं कि खेतीबाड़ी सब सरयू मइया ने ले लिया। भूमिहीन हो गए। प्रशासन ने थोड़ी सी जमीन बसने के लिए दी है। वहीं, पहड़वापुर के राघवराम यादव बताते हैं कटान में 100 बीघा खेती चली गई। नदी के पीछे जो जमीन छूटी भी उस पर खेती करने के लिए नाव से जाना पड़ता है। इसी तरह मटिहा के कल्लू शुक्ला का 25 बीघा नदी की कोख में समा गया। पारा गांव के ब्रह्मदेव सिंह और मुकेश सिंह कहते हैं आधा से ज्यादा खेती धारा में चली गई है बची-खुची खेती पर फसल तैयार कर परिवार पालते हैं। घर बांध और रामजानकी मार्ग के बीच में होने कारण सुरक्षित है लेकिन गांव के मुहाने पर बांध पर सरयू का तेज दबाव बना रहता है। यही लगता है कि अब बंधा कटेगा कि तब। कहते हैं कि बांध पर मरम्मत कार्य जो हो रहा वह नाकाफी है । भगवान भरोसे पारा और मटिहा गांव है। टकटकवा के राम सिंह, रामजियावन, शिव कुमार, प्रह्लाद, बबलू कहते हैं कि खेती तो गई अब नदी का रुख गांव की तरफ है। किसानों का कहना है सरयू के किनारे कभी खुशहाल जिंदगी कट रही थी। गन्ना, अरहर, गेहूं की फसल भरपूर होती थी अब तो खरीद कर खाने की नौबत है।
नाव से जाते हैं खेती करने
नदी के नजदीक आने से पीछे छूटी जमीन पर खेती करना जान जोखिम में डालना है। क्योंकि नाव के सहारे ही सरयू पार करते हैं। क्षेत्र के शेरवाघाट व उनियार सहित आधा दर्जन स्थानों से ग्रामीण नाव से सरयू की उफनाती धारा को पार करते हैं। जर्जर नाव ही इनकी सवारी है। बंजरिया, कटरिया, चांदपुर, खलवा, पारा, खंजांचीपुर, दलपतपुर, मटिहा टकटकवा सहित अन्य गांव के किसान रोज नदी पार कर खेती किसानी के लिए जाते हैं। शेरवा घाट और उनियार घाट से बडी नाव से सैकड़ों लोग उस पार फैजाबाद, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर की यात्रा करते हैं। शेरवा घाट से ही हर वर्ष होने वाले चौरासी कोसी परिक्रमा के श्रद्धालु भी नाव से शृृंगीऋषि आश्रम पहुंचते हैं। यहां पर वर्षों से पक्के पुल की मांग भी चली आ रही है।
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हर घर में अपनी नाव, हुए हैं कई हादसे
दुबौलिया ब्लॉक क्षेत्र में सरयू नदी किनारे बसे हर गांव में लगभग सभी घरों में अपनी नाव है। इसके सहारे उसपार खेती-किसानी करने लोग जाते हैं। ऐसा नहीं बहुत आसानी से खेेेती किसानी हो रही। इनकी नाव भी कई बार डूब चुकी है। पिछले दो वर्ष पूर्व 28 दिसंबर को पारा गांव के पास 25 किसानों को ले जा रही नाव पलट गई, जिसमें से चार किसान लापता हो गए। एक किसान का शव घटना के नौ दिन बाद मिला था, तीन का पता आज तक नहीं चला। शव नहीं मिलने से इनके परिवार को सरकारी इमदाद भी नहीं मिली। किसानों की माने तो नदी में हादसे होने का बाद कुछ दिनों तक मामला सुर्खियों में रहता है लेकिन फिर बाद में सब कुछ भुला दिया जाता है। हर साल सरयू में दर्जनों लोगों की मौत डूबने से होती है।
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