छठ पूजा: अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को पहला अर्घ्य आज
खरना पर मंगलवार को व्रतियों ने तैयार किया प्रसाद
अमहट, सरयू के नौरहनी व कुआनो के सेल्हरा घाट पर गहमागहमी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। हे सूर्यदेव जिस तरह समूचे ब्रह्मांड में आपकी आभा-ऊर्जा विद्यमान है, उसी प्रकार उनके भी पुत्र की कीर्ति दूर तक फैले। इस मन्नत के साथ मंगलवार को सूर्य उपासना के महापर्व का दूसरा दिन गुजरा। लोक आस्था के इस महापर्व पर नदी घाटों पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा। जिसकी आभा में कुआनो के अमहट और कुदरहा के सेल्हरा घाट के अलावा सरयू (घाघरा) नदी के नौरहनी घाट पर आस्था का महासंगम देखा जा रहा है। घाटों पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। एसपी आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि पर्याप्त संख्या में फोर्स तैनात की गई है। जिसमें महिला एसआई व आरक्षी भी शामिल हैं। फायर ब्रिगेड व स्पेशल पिकेट भी तैनात की गई है ताकि भीड़भाड़ में कोई अप्रिय घटना न हो।
पर्यावरण वादियों की दृष्टि में मौसम की संधिकाल के दौरान प्रकृति से प्राणि मात्र के बीच समन्वय कायम करने का यह दुनिया का सबसे अनूठा अनुष्ठान है। इसकी शुरुआत रविवार को नहाय-खाय के साथ हो चुकी है। सोमवार को नहाय खाय और मंगलवार को खरना के बाद बुधवार शाम को मुख्य पर्व पर व्रती माताएं अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर छठ मैया से आशीष मांगेंगी। बृहस्पतिवार 11 नवंबर सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 36 घंटे के इस निर्जला व्रत में पुत्र के दीर्घायु और यशस्वी की कामना की जाएगी। नहाय खाय में पंचमी को दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को चूल्हा बनाकर, उसमें अक्षत, धूप, दीप व सिंदूर से पूजा की गई। प्रसाद के लिए रखे आटे की फुल्की और खीर रसियांव रोटी पकाकर चौके में ही खरना किया। शहर के दक्षिण स्थित अमहट घाट और पुरानी बस्ती के निर्मली कुंड पोखरे पर भुवन-भास्कर की कृपा प्राप्त करने को आतुर अनुयायियों का हुजूम उमड़ पड़ा। कोई वेदी रंगने में मगन दिखा तो कई अपने ढंग से पूजा अनुष्ठान संपन्न करते रहे।
---------------
प्रसाद और फल से सजती है बांस की टोकरी
इस अनुष्ठान के दौरान प्रसाद और फल से पूरी बांस की टोकरी सजाई जाती है। बांस की दो तीन बड़ी टोकरी, प्रसाद रखने के लिए बांस या पीतल के बने तीन सूप, लोटा, थाली, दूध और जल के लिए ग्लास, नए वस्त्र साड़ी, कुर्ता-पजामा के अलावा पानी वाला नारियल, पत्तेयुक्त गन्ना, सुथनी और शकरकंद, नाशपाती और बड़ा मीठा नींबू यानी टाब रखते हैं। शहद की डिब्बी, पान और साबुत सुपारी, चावल, लाल सिंदूर, धूप और एक बड़ा दीपक, हल्दी और अदरक का हरा पौधा कैराव, कपूर, कुमकुम, चंदन, मिठाई भी अनिवार्य सामग्री है।
--------
अर्घ्य मंत्र
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते। अनुकंपये माम भक्त्या गृहणार्घ्यं दिवाकर:
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय। मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा: