मौसम क ी बेरुखी से किसानों के इरादे पर फिरा पानी
बस्ती। मौसम की बेरुखी से किसानों के इरादों पर पानी फिर गया है। सभी पूर्वानुमानों को धता बताते हुए इस बार मानसून शुरुआत में ही झटका दे दिया।
अनुमान व्यक्त किया जा रहा था कि 17-18 जून को मानसून की पहली बारिश होगी। बादलों का सिस्टम भी बनकर तैयार था, मगर अचानक हवाओं का रुख बदलने से सारा ताना-बाना बिखर कर रह गया। इसकी कोई खास वजह भी नहीं बताई जा रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने की वजह से बारिश का माहौल नहीं बन पाया। मौसम के जानकार अब सात दिन बाद यानी सोमवार तक मानसून की बारिश होने का अनुमान लगा रहे हैं। हालांकि इस बीच तापमान 37-38 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र के अनुसार पश्चिम बंगाल की तरफ से आगे बढ़ रहे मानसून के 18 जून तक पूर्वी यूपी में पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। लेकिन, बिहार तक आकर मानसून ठिठक गया। इसके अब एक सप्ताह देर से पहुंचने का अनुमान है। पूूर्वानुमान को देखते हुए किसानों ने अपनी खेती की तैैयारियां तेज कर दी थी। खासकर धान रोपाई का कार्य तेजी पकड़ने लगा था। कई किसानों ने उम्मीद लगा रखी थी कि अच्छी बारिश हो जाएगी तो रोपाई करने में आसानी होगी। इससे उनकी पानी की खपत कम होती। लेकिन, मौसम की बेरुखी ने उनके इरादों पर पानी फेर दिया।
पिछले साल 18 जून को हुई थी 29 एमएम बारिश
2021 में 18 जून को मानसून की पहली बारिश हो गई थी। पहले ही दिन 29 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। मगर इस बार हफ्ते भर देर होने की संभावना है। बहादुरपुर ब्लॉक के प्रगतिशील किसान कौशलेंद्र नारायण पांडेय बताते हैं कि समय से मानसून न आने की वजह से इस बार धान की लागत बढ़ गई है। अनुराग पांडेय का कहना है कि मानसून पूर्व भी इस बार बारिश नहीं हुई लिहाजा रोपाई के लिए एक बीघे में आठ से 10 घंटे ट्यूबवेल चलाना पड़ रहा है। यदि बारिश हुई होती तो तीन से चार घंटे ही लगते।
बारिश न होने से आम व्यवसायी निराश
आम की बागवानी करने वाले सतीश बताते हैं कि इस बार डाल पर आम की फसल पकने में काफी देर हो रही है। बिना बारिश के स्वाद भी नहीं आ रहा है। आम के बाग खरीदने वाले सीतारामपुर निवासी अमरीका सोनकर का कहना है कि बारिश न होने से आम की बढ़त भी प्रभावित हो रही है। इस वजह से आम व्यवसायियों को नुकसान हो रहा है।