इटवा। कस्बे में लगने वाला जाम अब लाइलाज हो गया है। चौराहे पर चार से अधिक पुलिसकर्मियों की मौजूदगी होने के बावजूद जाम के झाम से राहगीरों को मुक्ति नहीं मिल पा रही है। जाम से निजात के लिए कार्ययोजना तो बनती है लेकिन उस पर अमल न होने से लोगों को प्रतिदिन परेशान होना पड़ रहा है। इटवा कस्बे को दो प्रमुख मार्ग बढ़नी-इटवा-डुमरियागंज और बांसी-इटवा-बिस्कोहर मार्ग चार भागों में विभाजित करता है। डुमरियागंज-इटवा-बढ़नी मार्ग बढ़नी को नेपाल से जोड़ता है। नेपाल जाने वाले बड़े छोटे वाहन सैकड़ों की संख्या में रोजाना इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। नेपाल, बढ़नी की तरफ से आने वाले वाहन मंडल मुख्यालय बस्ती, प्रदेश की राजधानी लखनऊ और दिल्ली की यात्रा डुमरियागंज से होकर गुजरती है।
वहीं, बिस्कोहर की तरफ से आने वाले वाहन जिला मुख्यालय सिद्धार्थ नगर और गोरखपुर इटवा-बांसी पर होकर गुजरते हैं। इतना ही नहीं बलरामपुर ,देवी पाटन आदि धार्मिक स्थलों को जाने वाले लोग इटवा-बिस्कोहर मार्ग से होकर गुजरते हैं जबकि इटवा कस्बे से होकर ही मिठौवा-मिश्रौलिया-सूपा-सिद्धार्थ नगर का मार्ग जाता है। लगन के सीजन में यहां जाम की स्थिति बनी रहती है।
बार एसोसिएशन इटवा के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता राजीव कुमार शर्मा कहते हैं कि मुझे तहसील में आने के लिए बढ़नी मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में जो समय घर से इटवा पहुंचने में लगता है।
उससे कहीं अधिक बढ़नी मार्ग से बिस्कोहर रोड पर तहसील परिसर पहुंचने में लग जाता है। वहीं, पहाड़ापुर निवासी प्रमोद कनौजिया कहते हैं कि आए दिन लगने वाले जाम से शादी विवाह में मिले सभी निमंत्रण देने वालों के यहां पहुंच पाना असंभव हो गया है। कुछ ऐसा ही दर्द वरिष्ठ अधिवक्ता अब्दुल हलीम का भी है।