युवाओं में बढ़ रहा रासायनिक रंगों से परहेज करने का क्रेज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। नई पीढ़ी सेहत और पर्यावरण को लेकर कितनी सजग है, इसका नमूना इस बार होली के त्योहार पर देखने को मिल रहा है। बनावटी चमक-दमक और खुशबू वाले रासायनिक रंग व अबीर-गुलाल से तौबा करके होली में इको फ्रेंडली ट्रेड अपनाने में आगे आ रहे हैं। न केवल होली के लिए बल्कि होलिका दहन में भी पर्यावरण के मद्देनजर तुलसी, सतावर, आंवला, आम, गूलर, चिड़चिड़ा जैसी औषधीय महत्व की वनस्पतियों का इस्तेमाल करने पर नई पीढ़ी ज्यादा जोर दे रही हैं। युवाओं से बात की गई तो वह खुलकर बोले कि रासायनिक रंगों का नफा-नुकसान अब लोग भांप चुके हैं। इसलिए बिना किसी संकोच के इको फ्रेंडली ट्रेंड अपनाए बिना किसी का भला नहीं हो सकता।
अब तय यह करना है कि हम होली का त्योहार उमंग बढ़ाने के लिए मनाएंगे या खुजली, आंख, चर्म, अस्थमा, ब्लड प्रेशर, घबराहट जैसी बीमारी फैलाने के लिए। बेहद सस्ते और हर जगह मौजूद तमाम फूल पत्तियों से ऐसा रंग तैयार हो सकता है जो न केवल जहरीले रसायनों से भरे हुए से महफूज रखेगा। साथ ही चेहरा ही नहीं पूरी शरीर दो गुना अधिक दमक उठेगी। प्रदूषण भरे माहौल में इको-फ्रेंडली कही जाने वाली प्राकृतिक रंगों की इस होली को अब नजर अंदाज करना श्रेयस्कर नहीं है। यकीन मानिए, आजमाएंगे तो अच्छा लगेगा।
हर साल की तरह इस बार भी बाजार में रासायनिक रंगों की भरमार है। अधिकतर दुकानों पर आकर्षक पैकिंग में सजे रासायनिक रंग, अबीर-गुलाल ही दिख रहे हैं। इनमें कुछ ब्रांडेड हैं तो तमाम लूज कहे जाने वाले। खुले रंग अबीर-गुलाल भी बाजार में मौजूद है। अमूमन हर कोई दिल खोलकर खरीदारी करते दिख रहा है। ऐसा नहीं है कि लोग इसके नुकसान से वाकिफ नहीं है, पर इसे नजर-अंदाज करना फैशन सा बन चुका है।
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रासायनिक रंग और उनका असर
-काला : लेड आक्साइड किडनी खराब, समझने की शक्ति में कमी।
हरा : कॉपर सल्फेट आंख की एलर्जी, अस्थाई अंधता।
बैगनी : क्रोमियम आयोडाइड अस्थमा, एलर्जी।
सिल्वर : एल्यूमीनियम ब्रोमाइड कैंसर।
नीला : प्रशियन ब्लू स्किन एलर्जी।
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सुरक्षित होली, जरूरी बात
- त्वचा और बालों में केमिकल का प्रभाव बचाने के लिए नारियल तेल या बेबी आयल लगाएं।
- केमिकल का असर अंदर तक न हो इसलिए मोटे, गाड़े रंग के शरीर का अधिकतर हिस्सा ढकने वाले कपड़े पहलें।
- रंग उतारने के लिए साबुन, डिटरजेंट की जगह बेसन, दही आदि का इस्तेमाल करें।
- एक बार में सारा रंग उतारने की कोशिश न करें। इससे त्वचा में खरोच आएगी।
- अगर जलन या रैडनेस हो तो डाॅक्टर को बताएं।
- आंख में रंग चला गया हो तो तुरंत साफ करें।
- होली खेलते समय या इसके दूसरे दिन तक कांटेक्ट लेंस न लगाएं।
- होली खेलने से पहले नाखूनों को काट लें।
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किस राशि के लोग कौन सा रंग खेले
मेष- लाल, वृष-पीला, मिथुन- हरा, कर्क- गुलाबी, सिंह- नारंगी, कन्या-हरा, तुला- नीला, वृष्चिक- मैरून, धनु-पीला, मकर-नीला, कुंभ-बैगनी, मीन-पीला
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कोट
रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से हो रही हानियों को समझना होगा। आज के दौर की जरूरत है कि रासायनिक रंगों से दूर, इको फ्रेंडली होली मनाई जाए। इससे एक ओर जहां प्रकृति के प्रति लगाव बढे़गा, वहीं रंग का उमंग भी चार गुना बढ़ जाएगा।
श्रेष्ठमुनि भटनागर, पर्यावरणविद