डिजिटल एक्सरे मशीन खराब, अल्ट्रासाउंड सप्ताह में तीन दिन
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल, मरीजों को हो रही परेशानी
बस्ती। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं हैं। संसाधनों के बावजूद अल्ट्रासाउंड व एक्सरे के लिए मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। बाहर अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को 800, जबकि डिजिटल एक्सरे के लिए 300 से 400 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल में भी ओपेक चिकित्सालय कैली की रेडियोलॉजिस्ट संबद्ध हैं।
जिला अस्पताल में रोज करीब 600 से 700 लोगों की ओपीडी होती है। इसके अलावा करीब 100 मरीज हालत में आते हैं। इन्हें अल्ट्रासाउंड अथवा डिजिटल एक्सरे की जरूरत होती है, मगर अस्पताल में दोनों सुविधा नहीं मिल पाती है। ऐसे में बाहर जांच करानी पड़ती है। जिला अस्पताल का डिजिटल एक्सरे करीब दो साल से खराब है। चिकित्सकों की मानें तो डिजिटल एक्सरे को ठीक कराने के लिए तमाम पत्राचार किया गया, मगर मशीन अब तक ठीक नहीं हो सकी है। इसके चलते यह ताले में कैद है।
कुछ ऐसा ही हाल अल्ट्रासाउंड सेंटर का है। यह सेंटर भी लंबे समय तक बंद रहा। कारण यहां तैनात रेडियोलॉजिस्ट लंबे अवकाश पर चले गए। इसके बाद सेंटर पर ताला लटक गया। तमाम पत्राचार के बाद यहां ओपेक चिकित्सालय में तैनाती रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विभा को संबद्ध कर दिया गया, जो सप्ताह में पहले एक दिन बैठती थीं, मगर अब तीन दिन काम देखती हैं। वह केवल मेडिकोलीगल ही संचालित करती हैं। क्योंकि उनके पास महिला अस्पताल में भी अल्ट्रासाउंट करने का जिम्मा है।
‘ओपीडी मरीजों के लिए बंद है अल्ट्रासाउंड’
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विभा ने कहा कि उनके ऊपर मेडिकोलीगल के साथ यहां भर्ती गंभीर मरीजों के अल्ट्रासाउंड की जिम्मेदारी है। उन्हें यहां व महिला अस्पताल में काम करने में कोई दिक्कत नहीं है, मगर सहयोग में एक रेडियोलॉजिस्ट मिल जाए तो ओपीडी मरीजों की भी अल्ट्रासाउंड की जा सकती है।
डिजिटल एक्सरे ठीक करने के लिए कई पत्र लिखे जा चुके हैं। फिर से पत्र लिखा जाएगा। अल्ट्रासाउंड के लिए ओपेक चिकित्सालय कैली की रेडियोलॉजिस्ट अस्पताल में तीन दिन बैठती हैं। एक रेडियोलॉजिस्ट की डिमांड भेजी गई है।
डॉ. आलोक कुमार वर्मा, एसआईसी, जिला अस्पताल