लॉकडाउन उल्लंघन के दो मुकदमे वापस
- कोविड-19 प्रोटोकाल उल्लंघन के दर्ज हैं सात सौ मुकदमे
- आईजी ने रेंज के तीनों जनपदों से तलब की मुकदमे की सूची
कोरोना की पहली व दूसरी लहर के दौरान दर्ज हुए थे मुकदमे
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कोरोना महामारी के दौरान कोविड-19 प्रोटोकाल व लॉकडाउन उल्लंघन से जुड़े मंडल के सात सौ से अधिक मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसे लेकर शासन स्तर से मुकदमों की संख्या और उनकी प्रक्रिया के बाबत रिपोर्ट मांगी गई है। इस क्रम में बस्ती जनपद पुलिस ने दो मुकदमों को अब तक वापस ले लिया है। एसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि शेष मुकदमों की वापसी के संबंध में प्रक्रिया चल रही है।
पुलिस महानिदेशक (अपराध) उत्तर प्रदेश ने वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान प्रोटोकॉल और लॉकडाउन उल्लंघन से संबंधित बस्ती परिक्षेत्र में कम गंभीर अपराध की धाराओं में जन सामान्य के विरुद्ध पंजीकृत अभियोगों को वापस किए जाने हैं। आईजी रेंज राजेश मोडक ने बताया कि रेंज के तीनों जनपदों के पुलिस अधीक्षक से मुकदमों का ब्योरा मांगा गया है। जिसमें उनकी स्थिति के बारे में भी रिपोर्ट तलब की गई है। उनमें कितने मुकदमों में न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। हालांकि इसमें वर्तमान व पूर्व जनप्रतिनिधियों पर दर्ज मुकदमों के संबंध में विचार न किए जाने को कहा गया है।
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इन मुकदमों की हो सकती है वापसी
आपदा प्रबंध अधिनियम-2005, महामारी अधिनियम-1897 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा-188, 269, 270, 271 व इससे संबद्ध अन्य कम गंभीर अपराध की धाराओं से संबंधित पूरे मंडल में करीब डेढ़ हजार से अधिक अभियोग दर्ज किए गए हैं। शासन ने इन मुकदमों में से जिनमें आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हो गए हैं, उन्हें वापस लिए जाने की अनुमति दे दी है। इसके अंतर्गत अधिकतम दो वर्ष तक की सजा तथा जुर्माने के प्रावधान से संबंधित पूरे प्रदेश में दर्ज मुकदमों को वापस लेने के लिए लोक अभियोजक को न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई है। प्रमुख सचिव न्याय ने प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-321 के प्रावधानों पर अमल करते हुए आवश्यक कार्रवाई कराने का निर्देश दिया है।