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यहां मशीन मौजूद, फिर भी बायालोजिकल जांच बाहर के भरोसे

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जिला अस्पताल : मशीन मौजूद, फिर भी बायोलाजिकल जांच की सुविधा नदारद
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बस्ती। अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित जिला अस्पताल का क्षेत्रीय निदान केंद्र में करीब दस वर्ष पहले बायोलाजिकल जांच के लिए शासन ने बायोहजार्ड मशीन स्थापित कराया था। तब यहां यह जांच आसानी से हो जाती थी, मगर पैथालोजिस्ट के स्थानांतरण के बाद यह मशीन बंद हो गई और अब इसके लिए मरीजों को निजी पैथालोजी केंद्रों पर जाना होता है, जहां दो सौ से एक हजार रुपये शुल्क लगता है। हालांकि यह जांच अस्पताल में निशुल्क होती है।
जिला अस्पताल के क्षेत्रीय निदान केंद्र में तमाम अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इसके संचालन के लिए दो पैथालोजिस्ट की तैनाती है। जो अधिकांश जांच तो करते हैं, मगर बायालोजिकल जांच के लिए मरीजों को बाहर के सेंटरों की शरण लेनी पड़ती है। हालांकि इस जांच के लिए मशीन तो मौजूद है, मगर इसके संचालन के लिए विशेषज्ञ हाथ नहीं हैै। ऐसे में मरीजों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
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बोले मरीज
जिला अस्पताल में सोमवार को फिजीशियन को दिखाने के बाद मरीज राम प्रताप को चिकित्सक ने यूरिन कल्चर कराने के लिए सुझाव दिया। मरीज क्षेेत्रीय निदान केंद्र पहुंचा तो उसे पता चला कि यह जांच नहीं हो पाएगी। राम प्रताप के परिजन ने बताया कि उसने बाहर एक केंद्र पर जांच दी है, जिसके लिए उसे सात सौ रुपये देने पड़े। बताया गया कि यह जांच 72 घंटे बाद मिलेगी और इसे बाहर भेजा जाएगा।
इसी प्रकार यूटीआई से परेशान एक मरीज के परिजन गांधी नगर निवासी राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि उनके पिताजी को चिकित्सक ने यूरिन में संक्रमण बताया है। इसके लिए बायोलाजिकल जांच यानी कल्चर की सलाह दी है, मगर अस्पताल में यह व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अब वे बाहर के सेंटर पर इसकी जांच कराएंगे।
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बोले, प्रभारी एसआईसी
प्रभारी एसआईसी डॉ. रामजी सोनी ने कहा कि मशीन तो है, मगर उसके संचालन के लिए बायोलाजिकल पैथालोजिस्ट नहीं हैं। ऐसे में यह जांच नहीं हो पा रही है। बायोलाजिकल पैथालोजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। जो मशीन यहां स्थापित की गई है। उसका इस्तेमाल इसके चलते बंद है।
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