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Basti News: बीमार जटायु ने जगाई भविष्य की आस विभाग ने शुरू किए संरक्षण के प्रयास

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कजरी कुंड के निकट मिला गिद्ध का बच्चा।
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बस्ती/कप्तानगंज। जिले में यदा-कदा जटायु के वंशज मिलने से पुरानी यादें लोगों की ताजा हो रही हैं। ढाई दशक के भीतर इनकी संख्या में तेजी से गिरावट आई है। कभी झुंड में घूमने वाले गिद्ध अब साल में कभी-कभार दिख जाए तो आश्चर्य की बात है। मंगलवार को कप्तानगंज थाना क्षेत्र के कजरी कुंड गांव के पास गिद्ध का बच्चा बीमारी हालत में मिला है। वन विभाग की टीम उसके इलाज में जुट गई है।
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खराब जलवायु और पशुओं में दवाओं के इस्तेमाल से जटायु की वंशावली नहीं पनप पाई। जिले में इनकी संख्या न के बराबर है। वन विभाग के पास भी गिद्ध प्रजाति पक्षियों की गिनती नहीं हैं। पंतनगर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अंबिका प्रताप पांडेय कहते हैं कि तीन दशक पहले तक गिद्धों की प्रजाति बस्ती में अक्सर देखी जाती रही है। इसके बाद इनकी संख्या कम होने लगी। इनके मरने की वजह पशुओं में लगने वाले डायक्लोफेनाक इंजेक्शन बना।
डॉ. पांडेय बताते हैं कि यह इंजेक्शन लगने वाले पशुओं की मौत के बाद उनके शव को जब गिद्ध आहार बनाते रहे तो इसका असर उनके शरीर पर बुरा प्रभाव छोड़ता था। इसी वजह से गिद्धों का प्रजनन प्रभावित हो गया और इससे इनकी वंशावली आगे नहीं बढ़ पाई। वर्तमान में गिद्धों की संख्या कम हो गई है।
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बस्ती में तो बिल्कुल गिद्ध नहीं दिखते हैं। ऐसे परिस्थिति में मंगलवार को कप्तानगंज क्षेत्र के कजरी कुंड गांव में गिद्ध का बच्चा दिखाई पड़ने पर कौतूहलवश काफी लोग एकत्र हो गए। वह उड़ नहीं पा रहा था। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी। मौके पर वन्य कर्मी रविंद्र सिंह, संजय निषाद पहुंचे।
उन्होंने रेस्क्यू करके गिद्ध के बच्चे को अपनी देखरेख में लिया। वन विभाग की टीम के अनुसार गिद्ध के बच्चे की हालत ठंड लगने से बिगड़ी है। टीम ने उसे मढ़नी ताल पहुंचाया। जहां रेंजर राजू प्रसाद की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है।
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