नगर बाजार (बस्ती)। जामा मस्जिद में रमजान माह के दूसरे अशरे की शुरुआत पर इमाम कारी नूर आलम ने नमाजियों को संबोधित करते हुए कहा कि पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नुम से निजात का होता है।
शनिवार को 10 रोजे पूरे होने के बाद बाबरकत माह-ए-रमजान का पहला अशरा पूरा हो गया। पहला अशरा रहमत का होता है। इसी के साथ एक मार्च से दूसरा अशरा शुरू हो गया जो कि मगफिरत का है। दूसरे अशरे में अपने गुनाहों की माफी मांगना सबसे अफजल मना गया हैं। पहले अशरे में रोजेदारों ने रहमत की दुआओं के साथ इबादत की, अब दूसरे अशरे में पे मगफिरत यानी गुनाहों से माफी की दुआएं मांगने के साथ इबादत करेंगे।
उन्होंने दूसरे अशरे की फजीलत बताते हुए ज्यादा से ज्यादा इबादत करने और तौबा-इस्तिगफार यानि गुनाहों से माफी मांगने की अपील की। कहा कि रमजान का दूसरा अशरा इंसान को अपने गुनाहों से सच्चे दिल से तौबा करने का मौका देता है। इस अशरे में दुआ के साथ ही उन्होंने पांचों वक्त की नमाज की पाबंदी, कुरान की तिलावत और जरूरतमंदों की मदद करने की नसीहत दी।
उधर, जामा मस्जिद में तरावीह की नमाज में भीड़ उमड़ रही है। सेहरी और इफ्तार के वक्त गांव का माहौल रौनक भरा दिखाई दे रहा है। रोजेदार पूरे जोश और अकीदत के साथ रोजा रख रहे हैं। मस्जिद कमेटी की ओर से साफ-सफाई और पीने के पानी का इंतजाम किया गया है।