बस्ती। जिले के अनुसूचित बाहुल्य गांवों में विकास की रोशनी फैलाने को संचालित एकीकृत विकास योजना धड़ाम हो चुकी है। उदाहरण के लिए दुबौलिया ब्लॉक के दो गांव हैं। यहां सात साल से बजट न आने के कारण स्वीकृत परियोजना को अब सरेंडर करने की तैयारी है। बताया गया कि पहली किस्त जारी होने के बाद गांव के विकास के लिए दोबारा फूटीकौड़ी तक नहीं मिल सकी है।
बता दें कि जिले के ऐसे गांव जहां अनुसूचित जाति के 25 प्रतिशत से अधिक परिवार निवास करते हैं, उनका चयन एकीकृत विकास योजना के तहत किया जाता है। यहां सड़क, नाली, बिजली, पेयजल समेत अन्य कार्य होते हैं। चयनित गांवों को विकास की मुख्य धारा में लाना था। दुबौलिया ब्लॉक के चयनित गांव नांदेकुंआ और बसंतपुर का हाल बेहाल है। साल 2019 में स्वीकृत परियोजना अधर में लटकी हुई है। एक-एक गांव में 1.59 करोड़ के हिसाब से 3.18 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। इतनी धनराशि से विकास कार्य कराए जाने थे।
प्रथम किस्त के रूप में एक-एक गांव को 40-40 लाख यानी 80 लाख रुपये जारी किए गए थे। इसमें भी खेल हो गया है। बताया गया कि कार्यदायी संस्था कुछ ही कार्य करके छोड़ दी है। इसके बाद लगातार धन की मांग हुई, मगर शासन स्तर से इस योजना में पैसा नहीं दिया गया, अब विभाग इस योजना को सरेंडर करने की तैयारी में है। इसके लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। बताया गया कि 80 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद योजना पर पूर्ण विराम लग गया है। पत्र के आधार पर अब विभाग योजना को सरेंडर कर देगा।
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बसंतपुर गांव में नहीं लगी एक भी इंटरलॉकिंग ईंट
दुबौलिया ब्लॉक के ग्राम बसंतपुर में 1.59 करोड़ की लागत से गांव में इंटरलॉकिंग और नाली का निर्माण होना था। इससे बारिश के समय जलभराव न हो और कीचड़ से छुटकारा दिलाने को एकीकृत विकास योजना से स्वीकृत परियोजना को यूपी सिडको को पूर्ण करने की जिम्मेदारी दी गई। 2019 की परियोजना अभी तक पूर्ण नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में न तो इंटरलॉकिंग हुई न ही नाली बनवाया गया है। बजट कहां खपा दिए पता नहीं, अब योजना सरेंडर करने की तैयारी है। कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया गया है कि परियोजना सीएमआईएस पोर्टल से हटाएं।
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नांदेकुंआ गांव में इंटरलॉकिंग सड़क और नाली अधूरी
ब्लॉक के नांदेकुंआ गांव में भी एकीकृत विकास योजना के तहत 1.59 करोड़ की लागत से इंटरलॉकिंग सड़क और नाली का निर्माण कराया जाना था। 2019 में स्वीकृत हुई परियोजना को पूर्ण कराने की जिम्मेदारी यूपी सिडको काी दी गई। प्रथम किस्त के रूप में 40 लाख रुपये आया था। धन व्यय दिखा दिया गया है, मगर कार्य 20 प्रतिशत ही हुआ है। 30 दिसंबर 2024 को परियोजना पूर्ण करके हैंडओवर करना था। मगर, धनाभाव में परियोजना लटक गई है। अब योजना को सरेंडर की तैयारी है। कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया गया है कि परियोजना सीएमआईएस पोर्टल से हटाएं।
ग्रामीण बोले- बजट कहां खपा दिए पता ही नहीं चला
एकीकृत विकास योजना के तहत गांव में नाली, इंटरलॉकिंग के लिए योजना स्वीकृत थी। बजट भी कुछ आया था, मगर कार्य नहीं हुआ है। योजना क्यों नहीं परवान चढ़ी इस बारे में जानकारी नहीं हुई। परियोजना को सरेंडर करने के बजाय पूर्ण कराएं।
-शिवेंद्र प्रताप सिंह, प्रधान बसंतपुर
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इंटरलॉकिंग सड़क की स्वीकृत परियोजना सिर्फ कागजी साबित हुई। बजट कहां खपा दिए पता नहीं चला। गांव में इंटरलॉकिंग न होने से बारिश के समय संकट गहराता है। नाली न बनने से जलभराव की भी स्थिति बनी रहती है। इस पर ध्यान दें।
-प्रवीण कुमार, निवासी, बसंतपुर
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कोट
दोनों परियोजनाएं अपूर्ण हैं। कई बार बजट मांगा गया, मगर धन नहीं आया। अब पोर्टल से दोनों परियोजनाएं हटवाने के लिए कार्यदायी संस्था को पत्राचार किया गया है। शासन में भी पत्र भेजा गया है।
-लालजी यादव, जिला समाज कल्याण अधिकारी, बस्ती।