सड़क की मरम्मत पर 1.13 करोड़ खर्च, फिर भी गड्ढे नहीं भरे
बस्ती। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत करीब 15 करोड़ की लागत से आठ साल पहले बनी 21.67 किलोमीटर कप्तानगंज-पिपरागौतम वाया नगर बाजार सड़क के गड्ढे अभी भरे नहीं हैं। हालांकि तीन साल पहले पीडब्ल्यूडी को यह सड़क हस्तांतरित कर दी गई और इसकी मरम्मत में 1.13 करोड़ की धनराशि खर्च की गई। इस खराब सड़क पर राहगीरों को सामान्य ढंग से चलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि बरसात का सीजन आ चुका है और ऐसे में इस सड़क से गुजरने वाले लोगों की दिक्कतें और बढ़ने की आशंका बनती जा रही है।
गौरतलब है कि तीन साल पहले पीएमजीएसवाई के तहत तैयार सड़क पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित कर दिए जाने के बाद मरम्मत पर पीडब्ल्यूडी ने 1.13 करोड़ खर्च किए, मगर इसकी सूरत नहीं बदल सकी और इस पर यात्रा आसान नहीं हो सकी। अब विभाग इस पर पैच लगवा रहा है, मगर इसमें भी गिट्टी अलग व कोलतार अलग नजर आ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र की इस अति महत्वपूर्ण 21.67 किमी मार्ग का निर्माण 2014 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हुआ था। पांच साल पूरा होने के बाद नियमानुसार 2019 में इस सड़क के मरम्मत की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड को दी गई।
इस सड़क की मरम्मत के नाम पर कागजों में 1.13 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, मगर मरम्मत के साल भर में ही इस पर गड्ढे ही गड्ढे नजर आने लगे। चूंकि निर्माण के तीन साल तक एक पाई भी रखरखाव के नाम पर नहीं मिलती है। ऐसे में अब विभाग इस पर पैच लगा रहा है। इसमें भी मानकों की अनदेखी होने लगी है और पूरी सड़क पर तारकोल अलग व गिट्टी अलग दिखाई दे रही है।
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17 किमी की दूरी कम कर देती है यह सड़क
बस्ती-लखनऊ फोरलेन स्थित कप्तानगंज चौराहे से नगर पहुंचने में राहगीरों के लिए तकरीबन 17 किमी दूरी कम हो जाती है। इसके कारण अयोध्या के तरफ से लौटकर कप्तानगंज आने वाले राहगीर टांडा, आंबेडकरनगर, आजमगढ़, काशी व जौनपुर जाने के लिए फुटहिया चौराहे पर न जा कर इसी मार्ग को चुनते हैं। यही नहीं जिले के दक्षिणी क्षेत्र में पहुंचने के लिए यह सड़क बहुत ही उपयोगी साबित होती है।
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राहगीरों ने सुनाई पीड़ा
राहगीर भगवानदीन और फुलवरिया निषाद ने कहा कि इसी सड़क से हम लोग कप्तानगंज होकर लखनऊ व जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। तीन-चार साल से कुछ दिन सड़क ठीक रहती है, तो कुछ दिन में फिर चलने लायक नहीं रहती। जगह-जगह गड्ढे हो जाने के कारण शाम होने के बाद सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है।
नगर बाजार निवासी पारस नाथ सोनी ने कहा कि पहले जो सड़क बनी थी, वह बहुत अच्छी थी। अब तो इधर पैच बन रहा है, तो उधर उखड़ जा रहा है। पिछले साल भी बरसात में सड़क के गड्ढों में पानी भर जाता था। इस बार भी पानी भर रहा है। पैच बेमतलब साबित हो रहा है।
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बोले, अधिशासी अभियंता
पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में नहीं था। पैच मरम्मत की जांच करवाई जाएगी और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पैच का कार्य एक सतत प्रक्रिया है जो चार किस्तों में किया जाता है। बरसात के पहले, बरसात के बाद, जाड़े के पहले और जाड़े के मौसम के बाद पैच मरम्मत की जाती है। पैच के लिए 60 से 70 हजार रुपये प्रति किमी प्रति वर्ष शासन से मिलता है। जिसका भुगतान भी चार किस्तों में किया जाता है। एक्सईएन ने बताया कि क्षेत्रीय विधायक की कार्य योजना पर इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।