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लापता विमान में बरेली की बेटी भी

Sun, 09 Mar 2014 08:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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कुआलालम्पुर से बीजिंग जाते वक्त दुर्घटनाग्रस्त हुए मलेशियाई एयरलाइंस के विमान के अभागे पांच भारतीय यात्रियों में बरेली की होनहार बेटी डॉ. चंद्रिका शर्मा भी थीं।
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इंटरनेशनल कलेक्टिव इन सपोर्ट ऑफ फिस वर्कर्स (आईसीएसएफ) में एक्जीक्यूटिव सेक्रेटरी डॉ. चंद्रिका के मायके राजेंद्रनगर में रहने वाले मां और भाई शनिवार को हादसे की खबर लगने पर एकबारगी इस अनहोनी पर विश्वास ही नहीं कर सके।

उनकी मां शकुंतला शर्मा भगवान से उनकी सलामती की दुआएं करती रहीं। नाते-रिश्तेदार दिन भर टीवी पर नजरें गढ़ाए हुए पल-पल की खबर लेते रहे।

तीन दशक पहले पिता हुए थे शहीद

48 वर्षीय डॉ. चंद्रिका की मां शकुंतला शर्मा शहर के सुर्खा छावनी में रुहेलखंड गैस सर्विस की संचालक हैं। चंद्रिका के पिता एमआर शर्मा भारतीय वायुसेना में कमांडर थे और करीब तीन दशक पहले शहीद हो गए थे। शकुंतला ने ही बेटी चंद्रिका और दोनों बेटों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया था।

चंद्रिका के बड़े भाई अतुल शर्मा आस्ट्रेलिया की एक बड़ी कंपनी में सीईओ हैं तो दूसरे भाई कैप्टन विमल शर्मा नई दिल्ली स्थित अमेरिकन डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में ऑडिटर हैं। विमल ने बताया उनको एक रिश्तेदार ने फोन पर सूचित किया कि चंद्रिका जिस विमान से गई हैं, वह लापता हो गया है।

उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ जा रहा है। चंद्रिका चेन्नई में रहती थीं और विमान में कुआलालम्पुर से बीजिंग को रवाना हुई थीं। उन्हें शनिवार को मंगोलिया में होने वाली यूनाइटेड नेशन की अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में भाग लेना था।

मां को चमत्कार की उम्मीद

आवास स्थित पूजाघर में बेटी की सलामती की दुआ कर रहीं चंद्रिका की मां शकुंतला शर्मा चमत्कार की उम्मीद लगाए हुई थीं। उनके लिए पल-पल भारी हो रहा था। कभी टीवी चैनल पर नजरें गड़ाए बेटे विमल से पूछतीं कि कोई खबर मिली, जवाब न में मिलता तो फिर आंख मूंद कर भगवान को याद करने लगतीं।

‘अमर उजाला’ ने चंद्रिका के बारे में पूछा तो मां के आंसू छलक पड़े। बोलीं, ‘बहुत अच्छी है मेरी बेटी। उसने सबका भला किया है, इसलिए उसका कुछ बिगड़ेगा नहीं, मुझे भगवान पर भरोसा है।’ विमल भी बेचैनी के साथ टेलीविजन पर नजरें लगाए रहे।

कभी चेन्नई में मौजूद अपने बहनोई केएस नरेंद्र को फोन करते तो कभी किसी रिश्तेदार को फोन लगाते। आस्ट्रेलिया से बड़े भाई अतुल शर्मा भी फोन पर उनके संपर्क में थे। राजेंद्र नगर के सी-32 स्थित उनके आवास पर पूर्व मंत्री डॉ. दिनेश जौहरी समेत कई शुभचिंतक भी दिलासा देने पहुंचे।
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कुछ महीने पहले ही आई थीं बरेली

दूर चेन्नई रहने के बाद भी चंद्रिका मां और भाई के बेहद नजदीक थीं। हर दूसरे दिन मां से फोन पर जरूर बात करती थीं। कई बार तो दिन में दो-दो बार बात हो जाती थीं। शकुंतला शर्मा ने बताया कि वह मेरी बेहद फिक्र करती रहती। खान-पान और दवा के बारे में पूछती थी। करीब छह महीने पहले चंद्रिका बरेली आई थीं। पिछले महीने मां को भी चेन्नई बुलाया था और 15 फरवरी को उन्हें दिल्ली तक छोड़कर लौट गई थीं।

डॉ. चंद्रिका फिसरीज की बड़ी विशेषज्ञ मानी जाती थीं। उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस मुंबई से मास्टर डिग्री ली थी और फिर सेंट्रल फॉर डेवलपमेंट स्टडीज से एमफिल किया। 1995 में आईसीएसएफ को बतौर प्रोग्राम आफीसर ज्वाइन किया। बेहतर कार्यों की वजह से 2002 में वह इसकी एक्जीक्यूटिव सेक्रेटरी बन गईं।

उनकी इकलौती बेटी दिल्ली की अंबेडकर यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में स्नातक कर रही हैं। डॉ. चंद्रिका समाजसेवी अरुणा राय के साथ काम भी कर चुकी हैं। उनकी मां बताती हैं कि बेटी हर साल कई गरीब परिवार की बेटियों का विवाह भी कराती थीं।
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