बरेली। बेरोजगार को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए शासन के मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान को बैंकों की उदासीनता से पलीता लग रहा है। मंडल भर की बैंकों के पास सात हजार आवेदन पहुंचे हैं, इसमें सिर्फ 418 को अब तक लोन मिला। शेष बैंकों की शर्तों की जंजीरों में युवाओं के आत्मनिर्भर बनने के सपने उलझकर रह गए
शासन से निर्धारित मानक के तहत आवेदक को आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो, सादे कागज पर हस्ताक्षर, प्रधान, सभासद से जारी सहमति पत्र, सामान्य के अलावा अन्य जाति प्रमाणपत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, शपथ पत्र अनिवार्य है।
इसके अलावा अगर पूर्व में किसी योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया है तो उसका प्रमाणपत्र भी संलग्न कर सकते हैं, लेकिन ये अभिलेख अनिवार्य नहीं। निजी भूमि न होने पर किरायानामा दे सकते हैं। कई बैंक आवेदक से निजी भूमि, एमएसएमई पंजीकरण मांग रहे हैं। सामानों के कोटेशन भी मांग रहे हैं।
जो भूमिहीन बेरोजगारों के लिए परेशानी का सबब बना है। दूसरी ओर, प्राप्त आवेदनों को जिलेवार जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र की ओर से सत्यापन के बाद सभी वांछित दस्तावेज संलग्न मिलने पर बैंकों को भेजे जा रहे हैं, लेकिन बैंकों के मानक पूरे न करने से लंबित हैं।
विभागीय स्वीकृति में बरेली अव्वल : योजना के तहत प्रदेश में सबसे ज्यादा आवेदन और विभागीय जांच के बाद लोन की स्वीकृति के लिए बैंकों को आवेदन पत्र भेजने में बरेली अव्वल है। आंकड़ों के अनुसार विभाग की ओर से 26 फरवरी तक 4,156 आवेदन पत्र बैंकों को भेजे। 891 आवेदन पत्र बैंकों ने स्वीकृत किए, लेकिन 245 को ही ऋण दिया। बैंकों की सुस्ती पर डीएम भी नाराज हुए थे। अजीत प्रताप सिंह