असफलता से न घबराएं- एसएसपी
एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने बताया कि जब मैंने हाईस्कूल किया तो महाराष्ट्र बोर्ड की टॉप-50 सूची में मेरा नाम शामिल था। जब इंटरमीडिएट किया तो उन दिनों महाराष्ट्र सरकार ने सूची ही जारी करना बंद कर दी थी। इसकी वजह यह थी कि तब इस सूची में नाम आने से वंचित रहे कई टॉपर्स ने आत्महत्या जैसी कोशिशें की थीं। कई बार मेधावियों में भी सम्मान को लेकर प्रतिस्पर्धा बन जाती है। किसी मामले में एक या ज्यादा बार असफल होना या पीछे रहने पर घबराना नहीं चाहिए। इतिहास गवाह है कि किशोरावस्था में असफल रहे लोगों ने भी सकारात्मक बदलाव कर कार्यक्षेत्र में कीर्तिमान रचे हैं।
दबाव में हैं अभिभावक और बच्चे
मनोविज्ञानी डॉ. हेमा खन्ना ने बताया कि कई बच्चे पढ़ाई को लेकर ज्यादा गंभीर होते हैं। निराशाजनक नतीजे आने पर वे टूट जाते हैं। ऐसे में उपेक्षा या कटाक्ष होने पर बच्चे इस तरह के कदम उठा लेते हैं। दरअसल, प्रतिस्पर्धा के दौर में बच्चों पर अच्छे प्रदर्शन का दबाव रहता है। वहीं, अभिभावकों पर भी दबाव रहता है कि उनके बच्चे आसपास के बच्चों से बेहतर अंक लाएं। खराब अंक लाने या फेल होने पर अभिभावकों का भावनात्मक सहारा मिलना बेहद जरूरी है। शिक्षकों व सहपाठियों को भी चाहिए कि वह इस तरह के विद्यार्थियों पर कटाक्ष करने की बजाय उन्हें दोबारा बेहतर प्रयास करने के लिए प्रेरित करें।