फिर नौ जनवरी को आरोपी राजवीर, महेश, विक्रम और पृथ्वीराज आदि ने उसके घर में घुसकर उसकी मां ईश्वरवती, भाभी ममता और परिवार के अन्य लोगों के साथ जमकर मारपीट की। इसमें उसकी मां के हाथ में चोट आई थी और उसकी भाभी का सिर फट गया था। वह गर्भवती थी। उसका गर्भपात भी हो गया था।
पुलिस नहीं कर रही थी सुनवाई
इसके बावजूद पुलिस ने सामान्य धाराओं में 19 जनवरी को रिपोर्ट दर्ज की। उसी दिन पुलिस ने दूसरे पक्ष को बुलाकर उनके खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कर ली। तब से पुलिस उनका उत्पीड़न ज्यादा कर रही थी। साथ ही आरोपियों को बचाने में लगी थी। वह जहां भी फरियाद कर रहे थे, पुलिस उनकी सुनने को तैयार नहीं थी।
इंस्पेक्टर क्राइम दिगंबर सिंह श्रीपाल को दो बार कोतवाली बुलाकर उसे जेल भेजने की धमकी दे चुके थे। श्रीपाल पुलिस से इतना परेशान हो गया था कि वह अपनी गाड़ी में केरोसिन रखकर ले गया था। मंगलवार को कोतवाली पहुंचकर उसने खुद पर केरोसिन छिड़का और आग लगा दी। जब तब पुलिसकर्मी ने आग बुझाई, वह गंभीर रूप से झुलस चुका था।
भाई बोला- सीओ ने लिए दस हजार रुपये
श्रीपाल के भाई अनेकपाल ने कोतवाली में ही सीओ चंद्रपाल सिंह पर उससे 10 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया। उसने बताया कि सीओ ने आश्वासन दिया था कि वह इस मामले में कार्रवाई करेंगे। इसके बाद उन्होंने दस हजार रुपये उससे ले लिए। खुद उसने सीओ को रुपये दिए थे। इस पर भी सीओ ने उसके साथ आने वालों को धमकाया कि अगर वे उसकी पैरवी को आए तो वे भी पिटेंगे।
एक भाजपा नेता की सरपरस्ती में बताया जा रहा दूसरा पक्ष
क्षेत्र में चर्चा है कि दूसरा पक्ष एक भाजपा नेता की सरपरस्ती में पुलिस पर भी अपना रौब जमाए है। पिछली बार भी जब दूसरे पक्ष पर मामला दर्ज हुआ तो इसी भाजपा नेता ने उनकी पैरवी कर उन्हें बचाने की कोशिश की थी। यह भाजपा नेता पहले भी शराब के धंधे में बदनाम रह चुका है। उसके एक रिश्तेदार पर अवैध शराब के मामले में रिपोर्ट भी दर्ज हो चुकी है। वह कई जगहों पर नकली शराब भी सप्लाई करता था।
घटना के संबंध में एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि दोनों पक्ष आपस में रिश्तेदार हैं। श्रीपाल पक्ष की ओर से दर्ज मामलों की विवेचना चल रही है। पुलिस पर दबाव बनाने के लिए श्रीपाल ने खुद को आग लगा ली। जांच कराई जा रही है, जो भी तथ्य होंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।