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खकरा में बने मगरमच्छ संरक्षण केंद्र

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पीलीभीत। जिले में खकरा नदी में मगरमच्छ संरक्षण केंद्र बनाया जाए। यह मांग वन्य एवं जल जीवों और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे शिवम कश्यप ने उठाई है। उन्होंने इस संबंध में बुधवार को जिलाधिकारी से मुलाकात की। जिलाधिकारी ने इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया है।
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आए दिन मगरमच्छ नदी से निकल कर आबादी के बीच नालों के जरिए पहुंच जाते हैं। किसानों पर भी हमला कर देते हैं। शिवम का कहना है कि खकरा नदी में मगरमच्छ संरक्षण केंद्र बनाया जाए और इस तरह का संरक्षण केंद्र बनाया जाए जहां पर्यटक भी पहुंचे। खकरा नदी में अगर मगरमच्छ के लिए संरक्षण केंद्र बनता है तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। नदी से बालू का अवैध खनन रुकेगा। नदी क्षेत्र प्रशासन और शासन की निगरानी में रहेगा। जिले की नदियों में मगरमच्छ बड़ी संख्या में हैं। यह बात पहले से साबित हो चुकी है। दो महीने में वन विभाग की टीमों ने ही 33 मगरमच्छ रेस्क्यू किए हैं।
चेन्नई में पहला मगरमच्छ संरक्षण केंद्र
चेन्नई में एशिया का पहला मगरमच्छ संरक्षण केंद्र है। टूरिस्ट मगरमच्छ को देखने के लिए यहां जाते हैं। इसकी शुरूआत अमेरिका से भारत आकर बसे रोमलस व्हिटेकर ने 1976 में की थी। मगरमच्छ की कुल 23 प्रजातियों में से 17 प्रजातियों को देखा जा सकता है।
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जैव विविधता बनाए रखने के लिए जल जीवों और वन्य जीवों का संरक्षण जरूरी है। पीलीभीत जिले में नदियों और तालाबों जल जीव हैं। इनका सर्वे कराया जाए। ताकि यह आकलन हो सके कि इनके लिए क्या संरक्षण किया जा सकता है।
- विपुल मौर्य, प्रोजेक्ट एसोसिएट, भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून
न्यूरिया से लेकर पीलीभीत तक नदी में मगरमच्छ बड़ी संख्या में हैं। इनके संरक्षण का केंद्र बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। टाइगर रिजर्व और चूका बीच में भी पर्यटक संख्या बढ़ सकती है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार को ध्यान देना चाहिए। - शिवम कश्यप
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