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चुनावी यादें: राजवीर की जीप फंसी तो अटल बिहारी वाजपेयी बोले- मुझे दो स्टीयरिंग, ये तुम्हारे बस का नहीं है

Mon, 08 Apr 2024 06:11 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

चुनाव से जुड़ा संस्मरण साद करते हुए वयोवृद्ध नेता सुभाष पटेल ने कहा कि उन दिनों अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से चुनाव प्रचार करने आए थे। जिस जीप में अटल जी सवार थे, वह राजवीर सिंह चला रहे थे। अचानक जीप गड्ढे में फंस गई थी। जब राजवीर से जीप नहीं निकली तो अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि लाओ स्टीयरिंग मुझे दो। 
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ कुंवर सुभाष पटेल और अन्य नेता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली से दिग्गज नेताओं का सीधा जुड़ाव रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर भी बरेली के लोगों के जेहन में कई यादें हैं जो चुनाव के मौके पर ताजा हो जाती हैं। पूर्व विधायक व महापौर रहे भाजपा के वयोवृद्ध नेता कुंवर सुभाष पटेल ने ऐसा ही संस्मरण बताया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ाने के साथ ही कैसे चुटकी भी ली थी। 

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आंवला लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सांसद रहे राजवीर सिंह के शुरुआती चुनाव से जुड़ा संस्मरण साद करते हुए सुभाष पटेल ने कहा कि उन दिनों अटल बिहारी बाजपेयी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से चुनाव प्रचार करने आए थे। उन्हें आंवला में जनसभा करनी थी। बरेली में उनके आवास पर नाश्ता करने के बाद ये लोग राजवीर सिंह की जीप से आंवला के लिए निकले थे। जीप राजवीर सिंह खुद चला रहे थे। 

अटल बोले- ये तुम्हारे बस का नहीं है 
रास्ते में बने गड्ढे में जीप फंस गई तो अटल और राजवीर को छोड़कर बाकी नेता धक्का लगाने लगे। इस प्रयास में सब नेता धूल से नहा गए। धूप भी तेज थी। अटल भी पसीने से तरबतर थे। तब एकाएक उन्होंने कहा कि राजवीर लाओ स्टीयरिंग मुझे दो, ये तुम्हारे बस का नहीं है। उस वक्त राजवीर सिंह समेत बाकी नेता झेंप गए थे। इसके बाद नेता दोगुने जोश से लगे और जीप निकल गई।

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सुभाष पटेल बताते हैं कि विनोदी स्वभाव के अटल जी आंवला की जनसभा में ये किस्सा सुनाना नहीं भूले। जनता से कहा कि अभी राजवीर की गाड़ी फंस गई थी, फिलहाल मैं साथ था तो निकल गई। अब आप लोग चुनाव में इनकी गाड़ी मत फंसा देना। 

इस पर वहां मौजूद लोगों ने ठहाके लगाए और राजवीर सिंह को चुनाव जिताने की हामी भरी। सुभाष पटेल ने हेमवती नंदन बहुगुणा के साथ बरेली के अपने संस्मरण भी साझा किए। कहा कि पहले बेहद कम खर्च में सादगी से चुनाव हो जाते थे। इससे गरीब तबके से जुड़े नेताओं को भी मौका मिल जाता था। अब आयोग कितनी भी सख्ती बरते पर पर्दे के पीछे करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं।
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