उत्तराखंड पुलिस ने चेताया तो बंद हुई बार्डर पर यात्रियों से अवैध वसूली
विज्ञापन
गांवों के बाहर सड़कों पर बैरियर लगाकर वसूली कर रहे थे दबंग
बहेड़ी(बरेली)। उत्तराखंड बार्डर पर बैरियर लगाकर ई पास चेकिंग के नाम पर लोगों से वसूली कर रहे दबंगों को शुक्रवार को पुलिस ने खदेड़ दिया। उत्तराखंड की सीमा पर लिंक मार्गों पर स्थित उत्तराखंड के छह - सात गांवों में वसूली का यह खेल पिछले कई दिनों से चल रहा था। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया तो शुक्रवार को उत्तराखंड पुलिस ने बार्डर के इन गांवों में जाकर सख्ती दिखाई। पुलिस देख वसूली करने वाले मौके से खिसक गए। पुलिस ने ग्रामीणों को चेताया है कि दोबारा वसूली और अभद्रता की शिकायतें मिलीं तो आरोपियो को मुकदमे दर्ज करके जेल भेजा जाएगा।
लॉकडाउन खत्म हो जाने के बाद भी लोगों को उत्तराखंड पहुंचने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। ई पास की बाध्यता के चलते लोगों ने बार्डर पर स्थित उत्तराखंड के गांव कठंगरी, दरऊ, तीनपानी, बंगाली कॉलोनी, उत्तमनगर से होकर गुजर रहे लिंक मार्गोँ से होकर जाना शुरू कर दिया था। मगर यहां पर पुलिस न होने का फायदा गांव के कुछ दबंगों ने उठाना शुरू कर दिया था। राहगीरों से ई पास के नाम पर अवैध वसूली शुरू कर दी गई थी। मामला सुर्खियों में आने के बाद शुक्रवार को उत्तराखंड पुलिस इन गांवों में पहुंची तो वसूली करने वाले पुलिस को देखकर फरार हो गए। पुलिस ने दिन में दो-तीन बार इन गांवों में घूमकर लोगों को अवैध वसूली पर कार्रवाई की चेतावनी दी। इससे उत्तराखंड जाने वालों को राहत मिल गई है। वहीं किच्छा रोड पर भी अवैध वसूली की शिकायतों के चलते पुलिस तैनात कर दी गई है।
बंगाली कॉलोनी में रोजाना ही स्थानीय लोग राहगीरों को परेशान करते थे। शुक्रवार सुबह पुलिस आने के बाद अब सभी नदारद हो गए हैं। अब लोग आराम से आ-जा रहे हैं। - आनंद कुमार, बहेड़ी
विज्ञापन
मेरे पास उत्तराखंड जाने के लिए ई पास था। दरऊ रोड पर पुलिस भी मिली लेकिन किसी ने टोका नहीं। एक सप्ताह पहले दलालों ने कार निकालने के लिए सौ रुपये लिए थे। - अभिषेक गंगवार, नबावगंज
उत्तमनगर रोड पर पुलिस मिली थी, ई पास देखने के बाद जाने दिया। कहीं कोई दलाल चेकिंग करते नहीं मिला। सख्ती के बाद अब आराम से आना-जाना हो रहा है। - नीलेश सक्सेना, बरेली
बरेली से अचानक रुद्रपुर जाना पड़ गया। बार्डर पर ई पास जरूरी था। किसी ने भंगा रोड बताया तो वहां से आराम से चले गए, किसी ने रोककर पैसे भी नहीं मांगे। - रवि पांडेय, पीलीभीत