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Bareilly News: किच्छा नदी में समाई पानी की टंकी, करोड़ों की परियोजना दफन

Wed, 09 Sep 2026 02:00 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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शेरगढ़। विकास क्षेत्र के गांव बैरमनगर में किच्छा नदी के किनारे जल जीवन मिशन के अंतर्गत करीब 3.97 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही पानी की टंकी मंगलवार को कटान से नदी में समा गई। पिछले बृहस्पतिवार को नदी ने टंकी की चहारदीवारी को अपने आगोश में ले लिया था। नदी के लगातार बढ़ते कटान से करोड़ों की लागत से तैयार की जा रही परियोजना किच्छा नदी ने दफन कर दी।
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पहाड़ों पर हुई तेज बारिश के चलते उफान पर चल रही किच्छा नदी शेरगढ़ क्षेत्र में कटान कर रही है। करोड़ों की परियोजना इस कटान और जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। लोग पहले ही निर्माण पर सवाल उठा रहे थे और नदी में टंकी बह जाने के साथ ही ग्रामीणों की उम्मीदें भी बह गईं।


आरोप : टंकी के निर्माण में बरती गई लापरवाही
नदी के इस कटान से ग्रामीण पहले ही आशंकित थे। ग्रामीण राधेश्याम कश्यप, जलील अहमद, लालता प्रसाद, उमेश गुप्ता आदि ने आरोप लगाते हुए बताया कि इस सरकारी धन को जानबूझ कर बर्बाद किया गया है। जब टंकी का निर्माण शुरू कराया गया था तो किच्छा नदी महज 100 से 125 मीटर दूर रही होगी। टंकी निर्माण के लिए जगह के भी विकल्प थे। गांव में पर्याप्त जगह थी लेकिन लापरवाही के चलते इस धन का दुरुपयोग हुआ। जिम्मेदारों की अदूरदर्शिता के कारण करोड़ों रुपये का सरकारी धन बर्बाद हुआ। ऊपर से ग्रामीणों के लिए परियोजना का लाभ मिलने में का भी इंतजार बढ़ा दिया है।
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20 हजार की आबादी को चार साल से था स्वच्छ पेयजल का इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक, बैरमनगर और इसके मजरे को मिलाकर करीब 20 हजार की आबादी है। इस आबादी को करीब चार साल से स्वच्छ पेयजल का इंतजार था। करीब 2022-23 में इस परियोजना पर काम होना शुरू हुआ था। पूरे गांव में पाइपलाइनें बिछ गईं थी, सबमर्सिबल पंप, सोलर सिस्टम लग चुका था और पानी की सप्लाई पंप के सहारे भी अक्सर दी जाने लगी थी। पूरी परियोजना पर करीब 60 से 70 फीसदी काम पूरा हो चुका था। इंतजार था तो टंकी निर्माण के पूरा होने का। मगर ग्रामीणों के सपने पर पानी फिर गया। निर्माण में हुई लापरवाही ने न सिर्फ धन की बर्बादी की बल्कि यहां की जनता का इंतजार और लंबा कर दिया।

ऑपरेटर रूम भी खतरे में
टंकी के पास में बना ऑपरेटर रूम अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है। यही हालात रहे यह कमरा भी कटान में समा सकता है। बृहस्पतिवार को जब नदी बाउंड्रीवॉल की तरफ बढ़ी थी तो कर्मचारियों ने जेनरेटर, सौर ऊर्जा पैनल, पंप, डोमर, स्काडा सिस्टम सहित अन्य महत्वपूर्ण उपकरण वहां से हटाकर बचा लिए थे। मगर परियोजना के अधिकांश निर्माण को वे सुरक्षित करने में असहाय दिखे।
वर्जन
ग्राम पंचायत ने 2023 में प्रस्ताव भेजा था। उस समय नदी एक किमी दूर थी। यह उम्मीद नहीं थी कि कटान होगी। मंगलवार को निरीक्षण किया है। रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। फिलहाल चेतावनी बोर्ड लगवाए गए हैं, जिससे कोई नदी किनारे न जाए, जो हादसे का सबब बने।
- निधि शुक्ला, एसडीएम मीरगंज

भूमि का आवंटन नदी से 150 मीटर दूर किया गया है। नदी गांव की तरफ से जाकर घूमकर लौटी तो पानी की टंकी भी गिर गई। किसी ने इतने कटान की अपेक्षा नहीं की थी। अब किसी और जगह भूमि की तलाश की जाएगी।
-आकांक्षा सिंह, अधिशासी अभियंता ग्रामीण।

जिले में कई जगह जल जीवन मिशन में लापरवाही
सरदार नगर में जमींदोज हुआ था टैंक, दो हुए थे निलंबित
भमोरा। क्षेत्र के सरदार नगर में तालाब के किनारे करीब चार करोड़ की कीमत से बनवाए गए ओवरहेड टैंक में भी लापरवाही बरती गई। पांच मई को टैंक भरभराकर ढह गया था, कुछ लोग घायल भी हुए थे। इस मामले में तत्कालीन एक्सईएन कुमकुम गंगवार और जेई को निलंबित कर दिया गया था। संवाद
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आलमपुर में ढहाई गई थी तिरछा टंकी
भमोरा क्षेत्र के आलमपुर में भी जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी का निर्माण लापरवाही पूर्वक किया गया था। जमीन धंसने के कारण टंकी तिरछा हो गई थी और कभी भी गिर सकती थी। ग्रामीणों ने अफसरों से शिकायत की तो करीब एक महीने पहले ही उस टंकी को गिराया गया था।
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मझारा में अभी भी खड़ी है तिरछा टंकी
भमोरा के ही मझारा गांव में जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई पानी की टंकी तिरछा खड़ी है। ग्रामीणों को आशंका है कि यह कभी भी गिर सकती है। बीते दिनों एसडीएम आंवला ने इसका निरीक्षण भी किया था मगर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है।
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