फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

UP Ground Report: इस सीट पर भितरघात की आशंका से बढ़ा रोमांच... यहां तगड़ा मुकाबला; जीतने को सभी से लड़ना होगा

अभिषेक राज, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 09 May 2024 02:33 PM IST

सार

अवध और पूर्वांचल में एक कहावत खूब चलती है। न खेलब, न खेले देब। सियासी रिश्ते भी अजीब होते हैं। पाला बदलते ही चोला बदल जाता है। बोल भी बदल जाते हैं। चुनाव ज्यों-ज्यों आगे बढ़ रहा है, ऐसे सियासी आखेटक नजर आने लगे हैं। राहों में जो कभी फूल बिछाते थे, वो कांटे बिछा रहे हैं। कुछ खुले तौर पर तो, कुछ चोरी-चोरी चुपके-चुपके। इन सबकी चर्चा इसलिए, क्योंकि चुनाव उस दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां के शिकारी बहुत हैं। इधर ही नहीं उधर भी। ये खेल बिगाड़ने वाले अप्रत्याशित नतीजों का कारण बनेंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन
UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी के तीन और सीतापुर जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बनी धौरहरा लोकसभा सीट पर अलग ही समीकरण चल रहे हैं। यहां भितरघात का रहस्य है, तो प्रतिघात का रोमांच भी। नामांकन के समय जिस तरह से तीनों दलों ने दम दिखाया था, वह आज भी बरकरार है।

धौरहरा सीट के अस्तित्व में आने के बाद 2009 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस से मैदान में उतरे जितिन प्रसाद ने 51.53 फीसदी वोट शेयर के साथ एकतरफा जीत दर्ज की थी। भाजपा से उतरे राघवेंद्र सिंह महज 3.35 फीसदी वोट हासिल कर चौथे स्थान पर खिसक गए थे। 


पर, 2014 में रेखा वर्मा ने महज 33.99 फीसदी वोट शेयर हासिल कर यहां भगवा परचम फहरा दिया। इस चुनाव में कांग्रेस के जितिन प्रसाद 16.63 फीसदी वोट ही हासिल कर सके। पहले चुनाव में भाजपा को चौथे स्थान पर धकेलने वाली कांग्रेस चौथे स्थान पर खिसक गई। 2019 में रेखा वर्मा का वोट शेयर बढ़ा और जीत भी बरकरार रही। 

भगवा खेमे ने रेखा वर्मा को फिर मैदान में उतारा है। सपा ने आनंद भदौरिया, तो बसपा  ने श्याम किशोर अवस्थी को उतारकर सवर्ण मतदाताओं में सेंध लगाने की पटकथा तैयार की है। प्रवीण शुक्ल कहते हैं, अवस्थी भले ही अभी हाथी की सवारी कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने पिछले दो चुनावों में कमल खिलाने में पसीना बहाया है। बागी ब्राह्मण के रूप में यह चेहरा मुकाबले को कुछ विधानसभाओं में त्रिकोणीय बना रहा है।
विज्ञापन

UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी के तीन और सीतापुर जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बनी धौरहरा लोकसभा सीट पर अलग ही समीकरण चल रहे हैं। यहां भितरघात का रहस्य है, तो प्रतिघात का रोमांच भी। नामांकन के समय जिस तरह से तीनों दलों ने दम दिखाया था, वह आज भी बरकरार है।

धौरहरा सीट के अस्तित्व में आने के बाद 2009 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस से मैदान में उतरे जितिन प्रसाद ने 51.53 फीसदी वोट शेयर के साथ एकतरफा जीत दर्ज की थी। भाजपा से उतरे राघवेंद्र सिंह महज 3.35 फीसदी वोट हासिल कर चौथे स्थान पर खिसक गए थे। 

पर, 2014 में रेखा वर्मा ने महज 33.99 फीसदी वोट शेयर हासिल कर यहां भगवा परचम फहरा दिया। इस चुनाव में कांग्रेस के जितिन प्रसाद 16.63 फीसदी वोट ही हासिल कर सके। पहले चुनाव में भाजपा को चौथे स्थान पर धकेलने वाली कांग्रेस चौथे स्थान पर खिसक गई। 2019 में रेखा वर्मा का वोट शेयर बढ़ा और जीत भी बरकरार रही। 

भगवा खेमे ने रेखा वर्मा को फिर मैदान में उतारा है। सपा ने आनंद भदौरिया, तो बसपा  ने श्याम किशोर अवस्थी को उतारकर सवर्ण मतदाताओं में सेंध लगाने की पटकथा तैयार की है। प्रवीण शुक्ल कहते हैं, अवस्थी भले ही अभी हाथी की सवारी कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने पिछले दो चुनावों में कमल खिलाने में पसीना बहाया है। बागी ब्राह्मण के रूप में यह चेहरा मुकाबले को कुछ विधानसभाओं में त्रिकोणीय बना रहा है।

महोली विधानसभा क्षेत्र जातीय समीकरणों में उलझा हुआ है। यहां 2018 के चर्चित जूतम पैजार की भी गूंज सुनाई दे रही है। युवा अरविंद मिश्र कहते हैं, यह जूता कांड के हिसाब बराबरी का समय है। वहीं, बुजुर्ग श्याम त्रिवेदी कहते हैं, बीती ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेइ...राम के नाम पर आगे बढ़ना है। सुमंत त्रिवेदी भी कहते हैं, जो बीत गई, वो बात गई। 
 

पंकज वर्मा कहते हैं, यहां 2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा व सपा में था। भाजपा के शशांक त्रिवेदी महज 12,172 मतों से जीते थे। पर, इस बार प्रत्याशी के बल पर बसपा यहां भी प्रभाव दिखा रही है। मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र में मिले आफताब आलम कहते हैं, सांसद कभी दिखती ही नहीं। रही बात विकास की, तो गांव और सड़क की बदहाली सारी हकीकत बता रही है। 
 

फिर मोदी मैजिक के भरोसे
पार्टी प्रत्याशी और संगठन को चुनाव में फिर मोदी मैजिक की उम्मीद है। पांच मई को हुई मोदी की सभा में उमड़ी भीड़ से पार्टी के नेता उत्साहित हैं। वह कह रहे हैं कि जनता का यह संदेश पार्टी के लिए सुखद है।

गठबंधन को बड़े चेहरे का इंतजार
सपा-कांग्रेस गठबंधन में यह सीट सपा के पाले में है। ठाकुर चेहरा आनंद भदौरिया जोर लगा रहे हैं। पर, संगठन को बड़े नेताओं की अनुपस्थिति अभी अखर रही है। महोली के प्रतीक सिंह कहते हैं, अखिलेश यादव और राहुल गांधी की संयुक्त सभा हुई, तो संदेश सकारात्मक जाएगा। मतों का विभाजन रुकेगा और पार्टी नए तेवर के साथ आगे बढ़ेगी।

2022 में भाजपा ने किया था क्लीन स्वीप
संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें धौरहरा, करता, मोहम्मदी लखीमपुर खीरी की, तो महोली व हरगांव सीतापुर जिले की हैं। 2022 में इन सभी पर भाजपा ने जीत दर्ज की।

जीतने के लिए सभी से लड़ना होगा
धौरहरा की राजनीति को करीब से जानने वाले शिवेंद्र त्रिवेदी कहते हैं, इस बार मुकाबला अच्छा देखने को मिल रहा है। बात 2014 व 19 वाली नहीं रही। दोनों बार ध्रुवीकरण से भाजपा से किसी का मुकाबला ही नहीं था, लेकिन इस बार तीनों पार्टियों के प्रत्याशी मजबूत हैं। सपा गठबंधन ने सवर्ण चेहरा उतारकर ध्रुवीकरण की गुंजाइश को काफी हद तक समाप्त किया है। बसपा ने ब्राह्मण चेहरा देकर सोशल इंजीनियरिंग का बेहतर प्रयोग किया है। 

समर के योद्धा
रेखा वर्मा, भाजपा : संगठन में मजबूत पकड़। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तराखंड की प्रभारी। लगातार दो बार धौरहरा से सांसद। पार्टी ने तीसरी बार मौका दिया है। महिलाओं में पैठ। जातीय समीकरण साधने में माहिर।
 

आनंद भदौरिया, सपा
पूर्व विधान परिषद सदस्य। लखनऊ विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति की शुरुआत। कुशल वक्ता। मुद्दों पर आक्रामक रुख। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी। पार्टी की रणनीति में भागीदारी। युवाओं में पकड़।

 

श्याम किशोर अवस्थी, बसपा
पुराने भाजपाई। सांसद रेखा वर्मा के करीबी भी रहे। इस बार हाथी की सवारी कर रहे हैं। ब्राह्मणों में अच्छी पकड़। हमलावर रुख से सभाओं में मतदाताओं को बांधने की कोशिश।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next