मुसलमानों को वोट बैंक न समझें राजनीतिक दल
उलमा ने कहा कि राजनीतिक दल मुसलमानों का उपयोग वोट बैंक के रूप में करते हैं। सत्ता में आने के बाद उनकी कोई सुध नहीं लेते। मुसलमान किसी पार्टी के गुलाम नहीं। कोई दल उनको अपना बंधुआ मजदूर न समझे। जो राजनीतिक दल हमारे लिए काम करेगा, हम उसी के साथ खड़े होंगे।
ये रहे मौजूद
बैठक में हाफिज नूर अहमद अजहरी, सूफी अब्दुलरहमान कादरी (छत्तीसगढ़), सूफी पीर मोहम्मद हनीफ चिश्ती, मौलाना मजहर इमाम (बंगाल), मौलाना अब्दुस्सलाम रजवी (कर्नाटक), मौलाना रिजवानुलहक (तामिलनाडु), मुफ्ती शाकिरूल कादरी (राजस्थान), मुफ्ती फारूख आलम रजवी (पंजाब), कारी अब्दुर रहमान जियाई (मुंबई), डॉ. सय्यद अशरफ कादरी (उत्तराखंड), सुजाअत अली कादरी, मौलाना फारूख बरकाती (दिल्ली) सहित तमाम उलमा मौजूद रहे।