उर्स के मौके पर सजी पहलवान साहब की दरगाह।
बरेली। उर्स-ए-वासिल के दूसरे रोज तकरीर हुई और नातो मनकबत की महफिल सजाई गई। इसमें उलमा इकराम ने साहिबे उर्स हजरत सैय्यद वासिल शहीद उर्फ पहलवान साहब की हयाते जिंदगी पर रोशनी डाली।
इस मौके पर तकरीरी जलसा कारी फुरकान रजा नूरी की सदारत में आयोजित किया गया। इसमें मुफ्ती अफाक बरकाती, मौलाना मंसूब आलम, मौलाना सनाउल्लाह ने जलसे को खिताब किया। निजामत मुफ्ती खुर्शीद आलम ने की। नातो मनकबत का नजराना मोहम्मद शर्फ आलम और मोहम्मद खुर्शीद ने पेश किया। तकरीब की सरपरस्ती नबीरे आला हजरत मौलाना तौकीर रजा खां ने की। डॉ. नफीस खां की कयादत में हुए सभी कार्यक्रम उर्स प्रभारी नोमान रजा खान की निगरानी में संपन्न हुए। दुआ सज्जादानशीन फरहान रजा खान ने की। दिन में लोगों का दरगाह शरीफ पर हाजरी का सिलसिला रहा। कार्यक्रम की व्यवस्था में इमरान खान, मोहम्मद शफी, रिजवान हुसैन अंसारी, शहजाद पठान रहबर अंसारी आदि का सहयोग रहा।
आला हजरत की रूहानी महफिल कल
बरेली। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी की 100वीं रूहानी महफिल नूरी मरकज में 28 अक्तूबर को सजाई जाएगी। शहजादे आला हजरत मौलाना मन्नान रजा खां मन्नानी मियां ने बताया कि आला हजरत का विसाल 28 अक्तूबर 1921 को हुआ था। इस लिहाज से आला हजरत के विसाल को सौ साल पूरे हो रहे हैं। इसी सिलसिले में यह महफिल सजाई जा रही है। इसमें उलमा इकराम की तकरीर होगी। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि वे आला हजरत की याद में महफिलें सजाएं और खिराजे अकीदत पेश कर दुआ करें। बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खान वारसी ने बताया कि महफिल का आगाज दिन में 11:30 से होगा। कुल शरीफ की रस्म दोपहर 2:38 बजे अदा की जाएगी।