डॉक्टर और स्टाफ पर लगाया लापरवाही का आरोप, पुलिस ने तहरीर लेकर पोस्टमार्टम कराया पर नहीं लिखी रिपोर्ट
बरेली। प्रेमनगर इलाके में सूद धर्मकांटा चौराहे के पास बच्चों के अस्पताल में शुक्रवार रात दो मासूमों की मौत हो गई। दोनों बच्चों के घरवालों ने डॉक्टर और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया और फिर बच्चों के शवों को लेकर एसएसपी ऑफिस पहुंच गए। एसएसपी की गैरमौजूदगी में घंटों तक वे यहां भटकते रहे। पुलिस ने दोनों परिवारों से तहरीर लेने के बाद एक शव का पोस्टमार्टम भी कराया मगर रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
एयरफोर्स गेट पर संत नगर कॉलोनी में रहने वाले अंकित सक्सेना के मुताबिक साढ़े चार महीने की बेटी श्री को बुखार आने के बाद 19 नवंबर की शाम छह बजे वह उसे अस्पताल में ले गए जहां डॉक्टर ने उसके शरीर में पानी की कमी बताकर उसे अस्पताल में भर्ती कराने को कहा तो उन्होंने उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर भर्ती करा दिया। रात में डॉक्टर ने कहा कि बच्ची की हालत ठीक बताते हुए सुबह उसे घर ले जाने को कहा। अंकित का कहना है कि बच्ची वार्ड में भर्ती थी। वह अस्पताल की लॉबी में बैठे थे।
तड़के साढ़े चार बजे वह अपनी बेटी को वार्ड के बाहर से ही देखने गए तो वह काफी बैचेन लगी। वार्ड ब्वाय अंदर सो रहा था जो काफी कोशिश के बाद भी नहीं जगा। उन्होंने रिसेप्शन पर जाकर वार्ड ब्वाय को फोन कराया तो तो वह जागा और दरवाजा खोला। वह अंदर पहुंचे तो देखा तो बच्ची का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटा हुआ है जिसकी वजह से वह तड़प रही थी। उन्होंने उसके माथे पर पानी की पट्टी रखवाई मगर कहने के बावजूद न उसकी जांच की गई न कोई दवा दी गई। वार्ड ब्वाय ने बच्ची की नाक पर ऑक्सीजन का पाइप लगा दिया जिसके बाद वह बाहर आ गए। सुबह साढ़े छह बजे दोबारा वार्ड में पहुंचे तो पता चला कि बच्ची दम तोड़ चुकी है।
इसी वार्ड में फतेहगंज पश्चिमी के गांव मूलपुर निवासी अजय का भी नवजात शिशु भर्ती था। उसे 18 नवंबर को भर्ती कराया गया था और वह भी वेंटिलेटर सपोर्ट पर था। अंकित की बेटी की मौत की सूचना पर अजय ने उसे वेंटिलेटर से बाहर निकलवाया तो वह भी मृत मिला। इसके बाद दोनों बच्चों के परिवारों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। बाद में दोनों परिवारों के लोग बच्चों के शव को लेकर एसएसपी ऑफिस पहुंच गए। एसएसपी समाधान दिवस में गए हुए थे। सूचना पर इंस्पेक्टर प्रेमनगर वहां पहुंच गए। इंस्पेक्टर जसवीर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ इस मामले में जांच कर रहे हैं। उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे कार्रवाई होगी।
एक दिन पहले ही थम गईं थी सांसें पैसों के लिए रखे रहे वेंटिलेटर पर
फतेहगंज पश्चिमी के गांव मूलपुर में रहने वाले अजय के मुताबिक उनकी पत्नी ने मीरगंज के सरकारी अस्पताल में 18 नवंबर को बेटे को जन्म दिया था। बच्चा रो नहीं रहा था इसलिए उसे बरेली में धर्मकांटे के पास बच्चों के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। अजय के मुताबिक डॉक्टर ने बच्चे को आईसीयू में भर्ती कर बताया कि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। वह ठीक हो जाएगा। दूसरे दिन डॉक्टर ने बच्चे के दिमाग में पानी भरने की बात कहकर उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर ले लिया। आरोप है कि दूसरे दिन बच्चे को जब वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया गया तभी उसकी सांस बंद हो चुकी थी। यानी बच्चा तभी खत्म हो चुका था लेकिन बिल बनाने के लिए डॉक्टर उसे जबरन वेंटिलेटर में रखे रहे। अजय के बहनोई ओमलेश ने पुलिस को बताया कि उन्होंने डॉक्टर से कहा भी कि अगर बच्चे में कुछ न हो तो उन्हें दे दें लेकिन वह यही कहते रहे कि बच्चा जल्द ठीक हो जाएगा। शनिवार सुबह अंकित के बच्चे की मौत के बाद शक बढ़ा तो अजय ने भी अपने बच्चे को वेंटिलेटर से हटवाया। तब पता चला कि उसकी भी मौत हो चुकी है। अस्पताल वालों ने इसके बावजूद करीब 50 हजार रुपये ले लिए। इसके बाद अजय अपने बच्चे का शव लेकर एसएसपी ऑफिस पहुंचे। यहां पुलिस ने तहरीर लेने के बाद पोस्टमार्टम के लिए बच्चे का शव मांगा लेकिन अजय के परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। पुलिस को तहरीर देकर नवजात का शव गांव ले आए औरे अंतिम संस्कार कर दिया।
एसएसपी ऑफिस में मासूम के शव को सीने से चिपकाएं रोती रहीं मां और बुआ
एसएसपी ऑफिस का नजारा शनिवार सुबह काफी मार्मिक नजर आए। अस्पताल में मृत दोनों बच्चों के शव लेकर उनके परिवार इधर से उधर भटक रहे थे। अजय की पत्नी की तबियत ठीक नहीं थी लिहाजा परिजन उसे अस्पताल से सीधे घर ले गए थे। एसएसपी दफ्तर के मुख्य द्वार पर बैठी बुआ और दादी नवजात शिशु का शव सीने से चिपकाए रोती रहीं। अंकित की मां भी बेटी के शव को सीने से चिपकाकर बिलखती रहीं। करीब तीन घंटे तक दोनों परिवार की महिलाएं बच्चों के शव लिए एसएसपी ऑफिस में बैठी रहीं।
पुलिसकर्मी ने दिया ताना- डॉक्टर तुम्हें क्या घर से बुलाने गए थे
दोनों मृत बच्चों के परिवार वालों ने आरोप लगाया कि पुलिस बच्चों की मौत के जिम्मेदार डॉक्टर को बचाना चाह रही है। एसएसपी ऑफिर में ही एक पुलिसकर्मी ने उनसे यह तक कह दिया कि डॉक्टर क्या तुम्हें घर से बुलाने गए थे। इस पर अजय के बहनोई ने जवाब दिया कि वह भी बच्चे को मारने के लिए अस्पताल नहीं लाए थे। करीब डेढ़ घंटे बाद आई एक ट्रेनी महिला अधिकारी ने दोनों बच्चों के शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कहते हुए तहरीर मांगी। तहरीर देने के बाद एक बच्चे का पोस्टमार्टम भी हो गया लेकिन इसके बाद जब रिपोर्ट दर्ज करने को कहा गया तो पुलिस ने जवाब दिया कि मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ जांच कर रहे हैं। उनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोई कार्रवाई होगी।