दिल्ली-लखनऊ रेलखंड में ट्रेनों की अधिकतम गति को 130 किलोमीटर प्रतिघंटा करने के लिए कार्य शुरू हो गया है। अब तक इस रेलखंड में राजधानी एक्सप्रेस की औसतन गति 69 और लखनऊ मेल की महज 59 किलोमीटर प्रति घंटा है। ट्रैक की गति बढ़ाने के लिए काफूरपुर-कांकाठेर के बीच 18 किलोमीटर के रेलखंड में 280 के स्थान पर 335 किलोग्राम के स्लीपर डाले जा रहे हैं। इसके अलावा गाजियाबाद-हापुड़ के बीच ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली पर भी काम चल रहा है।
दिल्ली-लखनऊ रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव ज्यादा है। यहां से होकर गुजरने वाली 50 फीसदी से ज्यादा गाड़ियों की औसत रफ्तार कम और दबाव ज्यादा होता है। इसी कारण लेटलतीफी का शिकार होती हैं। औसत गति को बढ़ाने का काम दो साल से चल रहा है। 493 किलोमीटर के रेलखंड में छोटे-बड़े पुलों को मजबूत करने, टर्निंग प्वाइंट और रेलवे स्टेशनों के यार्ड को उच्चीकृत करने के काफी काम हो चुके हैं, लेकिन अब तक गाड़ियों की औसत गति अधिकतम 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक ही पहुंच सकी है।
धीमी गति से हो रहे काम
दो साल पहले ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन काम की गति धीमी है। रेलखंड के कुछ हिस्सों में अधिकतम गति 110 किलोमीटर है, दूसरी ओर कई हिस्से ऐसे भी हैं जहां गाड़ियों की अधिकतम रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर तक सीमित हो जाती है। ऐसे में यात्रा का समय कम नहीं हो रहा।
मुरादाबाद-दिल्ली के बीच ट्रैक उच्चीकरण के काम धीमी गति से हो रहे हैं। दरअसल, इस रेलखंड में 280 किलोग्राम के स्लीपर हैं। इस पर 110 किलोमीटर से अधिक रफ्तार पर गाड़ी नहीं चल सकती। ट्रेनों को 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने के लिए 335 किलोग्राम के स्लीपर डाले जा रहे हैं।
सीनियर सेक्शन इंजीनियर महेंद्र सिंह ने बताया कि स्लीपर बदलने समेत अन्य काम शुरू करा दिए गए हैं। जल्द काम पूरे हो जाएंगे। इस रूट पर ट्रेन की गति को 130 किलोमीटर प्रति घंटा किया जाना है।