सेहरामऊ दक्षिणी (शाहजहांपुर)। गांव विसाफकलां में मंगलवार सुबह जिंदबाबा के देवस्थान के पास चूल्हे की चिंगारी से झोंपड़ी में आग लग गई। झोंपड़ी में कल्लू की तीन साल की मासूम बेटी सुनीता की जिंदा जलकर मौत हो गई। ग्रामीणों ने पास के ट्यूबवेल से पानी डालकर बमुश्किल आग पर काबू पाया।
गांव से आधा किलोमीटर दूर जिंदबाबा का देवस्थान बना है। उसी के पास में रामपाल झोंपड़ी डालकर परिवार के साथ रहते हैं। परिवार के लोग मेहनत-मजदूरी कर गुजारा करते है। मंगलवार सुबह छह बजे रामपाल व उसका बेटा कल्लू खेतों में गन्ने की गुड़ाई करने गए थे। झोंपड़ी में रामपाल की पत्नी वीरावती व कल्लू की तीन साल बेटी सुनीता थी। सात वर्ष का सूरज और चार वर्षीय पूजा घर के बाहर खेल रहे थे।
पोती सुनीता को खाना खिलाने के बाद वीरावती ने चूल्हा जलाकर उस पर दूध गर्म करने के लिए रख दिया। वह हैंडपंप से पानी लेने के लिए बाहर चली गई। इस बीच चूल्हे से निकली चिंगारी से झोंपड़ी में आग लग गई। हवा चलने से कुछ ही देर में आग विकराल हो गई और पूरी झोंपड़ी लपटों से घिर गई। झोंपड़ी में बैठी सुनीता बाहर नहीं निकल सकी और उसकी जलकर मौत हो गई।
हैंडपंप से पानी लेकर वीरावती लौटी तो आग की उठती लपटें देखकर जोर-जोर से चिल्लाने लगी। शोर सुनकर गांव के लोग दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने पास में लगे ट्यूबवेल से बाल्टियों में पानी लाकर आग बुझाई, लेकिन तब तक मासूम सुनीता की मौत हो चुकी थी। उसका जला शव बाहर निकाला गया। सूचना पर पहुंची डायल 112 की टीम ने थाने पर सूचना दी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
तीन साल पहले पत्नी की मौत, अब बेटी जिंदा जली
हादसे के बाद परिवार के सभी सदस्य गमजदा हैं। उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। तीन साल पहले कल्लू की पत्नी की मौत बीमारी के कारण हो गई थी। उस समय सुनीता महज छह दिन की थी। तीन भाई-बहनों में सुनीता सबसे छोटी होने के कारण पूरे परिवार की लाडली थी।
खुले आसमान के नीचे आ गया परिवार
रामपाल की झोंपड़ी में आग लगने के बाद पूरा सामान जलकर राख हो गया। रजाई, गद्दे, चादर, चारपाई, अनाज, कपड़े आदि जलने से पूरे परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया। बेहद गरीब परिवार होने के कारण उनके सामने पेट भरने तक की दिक्कत आ गई। आसपास के लोगों ने मदद कर दोपहर के खाने-पीने का इंतजाम कराया है।
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