मतदाताओं में दिखा उत्साह फिर भी नहीं छू पाए पिछले साल का आंकड़ा
लखीमपुर खीरी। घड़ी की सुई के आगे बढ़ने के साथ ही जिले की आठों विधानसभा सीटों पर मतदान की रफ्तार भी बढ़ती गई। मतदाताओं में इस बार जबरदस्त उत्साह दिखाई पड़ा, लेकिन मतदान की समाप्ति तक जो मतदान प्रतिशत सामने आया उससे मायूसी हाथ लगी। सुबह सात बजे के पहले ही कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी लंबी कतारें लग गई थी। जैसे-जैसे सूरज चढ़ता गया मतदान प्रतिशत भी बढ़ता गया।
सुबह नौ बजे तक जिले में सिर्फ 10.43 फीसदी मतदान हुआ था, जबकि पूर्वाह्न 11 बजे यह मतदान प्रतिशत बढ़कर 26.23 फीसदी तक पहुंच गया। इस तरह इन दो घंटों में 15.80 फीसदी यानी पहले के दो घंटों की अपेक्षा डेढ़ गुना मतदान हुआ। 11 बजे के बाद मतदान की रफ्तार कुछ कम हुई। 11 बजे से एक बजे के बीच केवल 14.74 प्रतिशत ही मतदान हो पाया। हालांकि इस बीच धौरहरा में अच्छा मतदान हुआ। दोपहर बाद एक बजे तक 40.97 फीसदी मतदान हुआ। तीन बजे तक यह बढ़कर 52.98 फीसदी हो गई, जबकि शाम पांच बजे तक यह मतदान प्रतिशत बढ़कर 62.45 फीसदी तक पहुंच गया। शाम पांच बजे तक सबसे ज्यादा 64 फीसदी मतदान मोहम्मदी में हुआ। 63.20 फीसदी मतदान के साथ पांच बजे तक लखीमपुर दूसरे स्थान पर था। जबकि श्रीनगर में केवल 60.80 फीसदी मतदान हुआ था। निघासन और कस्ता में 62.50 फीसदी मतदान रहा था।
शाम पांच बजे से मतदान की समाप्ति तक जो परिणाम आए वह निराशाजनक थे। पलिया में कुल 66.65 फीसदी मतदान हुआ। निघासन में 69.39, गोला में 65.02, श्रीनगर में 60.80, धौरहरा में 67.31, लखीमपुर में 63.20, कस्ता में 65.20 और मोहम्मदी में 67.00 फीसदी मतदान हुआ। इस तरह जिले का औसत मतदान 65.54 फीसदी रहा। जो पिछले चुनाव की अपेक्षा करीब तीन फीसदी कम है।
धौरहरा और कस्ता में सुबह से ही मतदान में उतार चढ़ाव
धौरहरा और कस्ता में सुबह नौ बजे के बाद मतदान प्रतिशत में उतार चढ़ाव जारी रहा। धौरहरा में सुबह नौ बजे तक सिर्फ 9.71 फीसदी मतदान हुआ था, जो 11 बजे तक बढ़कर 28.13 और दोपहर एक बजे तक यह मतदान बढ़कर 44.03 पर पहुंच गया। वहीं कस्ता क्षेत्र में जहां सुबह नौ बजे तक केवल 08 फीसदी मतदान हुआ था। वहीं 11 बजे तक यह मतदान बढ़कर तीन गुना यानि 24.6 और एक बजे तक 38.00 फीसदी मतदान हुआ। इसके बाद कस्ता में मतदान की रफ्तार धीमी हुुई और तीन बजे तक यहां सिर्फ 49.5 फीसदी मतदान हुआ।
विधानसभा
पलिया : ज्यादातर मतदान केंद्रों पर भाजपा और सपा में रही टक्कर
पलियाकलां। विधानसभा चुनाव को लेकर हो रहे मतदान में शहरी क्षेत्र में जहां भाजपा हावी रही। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश मतदान केंद्रों पर भाजपा व सपा की टक्कर ही दिखाई दी। हालांकि कई गांव ऐसे रहे जहां बसपा व कांग्रेस ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए बढ़त बनाई है। थारू क्षेत्र की बात करें तो यहां काफी संख्या में लोग सपा के समर्थन में वोट देने की बात कहते नजर आए। मुस्लिम व सिख बाहुल्य क्षेत्र में भी सपा भाजपा से दो कदम आगे रही। कुछ हिस्सा बसपा व कांग्रेस के खाते में भी आता दिखाई दिया। दलितों में सभी पार्टियों में वोट बंटते दिखाई दिए। ज्यादातर दलित सपा, भाजपा व बसपा के साथ रहता दिखा। संवाद
किसान, कृषि कानून और महंगाई का मुद्दा रहा हावी
पलियाकलां। विधानसभा चुनाव में तराई इलाके की पलिया विधानसभा में किसान, कृषि कानून का मुद्दा भी हावी रहा, जबकि महंगाई को देखते हुए इस नजरिए से भी मतदाताओं ने वोट दिए। भाजपा से मुख्य विपक्षी की टक्कर में लोग समाजवादी पार्टी को देख रहे हैं। ऐसे में ज्यादातर लोगों का मानना है कि किसानी मुद्दे, कृषि कानून समेत महंगाई को लेकर सपा के पक्ष में मतदान करें। ऐसे मतदाताओं का नजरिया भी सपा की ओर इन मुद्दों पर झुकता दिखाई दिए। संवाद
2017 में पलिया विधानसभा में 68.02 प्रतिशत पड़े थे वोट
पलियाकलां। 2017 विधानसभा चुनाव में पलिया विधानसभा में 68.02 प्रतिशत वोट पड़े थे। कुल तीन लाख 40 हजार 784 मतदाताओं में से दो लाख 31 हजार 799 मतदाताओं ने वोट डाला था। जिसमें उस समय के भाजपा प्रत्याशी रोमी साहनी को एक लाख 18 हजार 069, जबकि उपविजेता रहे। कांग्रेस के सैफ अली नकवी को 48 हजार 841 मत मिले थे। रोमी साहनी ने 69 हजार 228 वोटों से जीत हासिल की थी। संवाद
निघासन में सपा और भाजपा में सीधा मुकाबला
निघासन। विधान सभा में मतदान के दिन आए रुझानों से साफ हो गया कि असली टक्कर सपा और भाजपा प्रत्याशियों के बीच में है। तिकुनिया हिंसा के बाद यहां पर एक वर्ग में भाजपा के खिलाफ माहौल दिखा था। लेकिन, इससे इतर यहां पर जातीय गणित ने कांटे का मुकाबला कर दिया है।
दलित बहुल निघासन विधानसभा में जहां भाजपा के शशांक वर्मा को लोधी, कुर्मी, चौहान और भार्गव बिरादरी के अलावा सभी वर्गों के वोट मिलने की संभावना है। वहीं, सपा प्रत्याशी आरएस कुशवाहा को मौर्या, यादव, कुर्मी, सिख और मुस्लिम वोट की बढ़त है, जबकि बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी होने की वजह से मुस्लिम वर्ग के वोटों में बिखराव माना जा रहा था। मुस्लिम वोट सपा के पक्ष में जाने से सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर है।
जमीनी रिपोर्ट के आधार पर बात करें तो विधानसभा क्षेत्र के बिनौरा, मोहबतिया बेहड़, अदलाबाद, मिर्जागंज, लालपुर, बेलापरसुआ, नरेंद्र नगर बेली, खरवहिया, बनवीरपुर, तिकुनियां, नबबुरी, निषाद नगर, परमोधापुर समेत करीब 40 ग्राम पंचायतों में लोगों ने बातचीत के दौरान बताया कि यहां सपा के पक्ष में मतदान हुआ है। वहीं, खैरहनी, नगर पंचायत निघासन, दौलतापुर, बंगलहा कुटी, दरेरी, बरोठा समेत करीब 21 ग्राम पंचायतों में भाजपा ने अपना दबदबा कायम रखा है। इस बीच बल्लीपुर भाजपा का गढ़ माना जाता था, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी उसी गांव का होने के भारी पड़ रहा है। उधर, मुस्लिम, सिख मतदाताओं का रुझान सपा की ओर रहा। निर्णायक वोट माना जाने वाला मौर्य बिरादरी का 70 फीसदी वोट सपा और 30 फीसदी वोट भाजपा में जाने के कयास लगाए जा रहे है। उधर, भाजपा मुस्लिम प्रत्याशी होने के कारण बसपा का जनाधार कम हुआ है।
गोला में ब्राह्मण, कुर्मी, दलित वोट में बंटा, मुस्लिम मतदाता एकजुट, सपा भाजपा में कांटे की टक्कर
गोला गोकर्णनाथ। विधानसभा-139 गोला में इस बार का चुनाव जातीय ध्रुवीकरण पर आकर टिक गया। यहां ब्राह्मण, कुर्मी, दलित वोट बटता नजर आया वहीं मुस्लिम मतदाताओं ने एकजुटता दिखाई। जातीय ध्रुवीकरण में फंसे चुनाव में संघर्ष सपा और भाजपा के बीच दिख रहा है। कशमकश, में फंसे चुनाव में सपा भाजपा में कांटे की टक्कर है।
इस बार के चुनाव में भाजपा से अरविंद गिरि, सपा से ब्राह्मण चेहरे के रूप में विनय तिवारी, कुर्मी बिरादरी से कांग्रेस प्रत्याशी प्रहलाद पटेल और बसपा से शिखा कनौजिया प्रमुख रुप से दावेदार हैं, जिसमें जातीय समीकरण के आधार पर निर्णायक माना जाने वाला ब्राह्मण, कुर्मी मतदाता बंटा नजर आया, वहीं बसपा का कोर वोटर दलित भी बिखरा हुआ नजर आया। विधानसभा के रायपुर, बिलहरी, सिकंदराबाद, नजीमाबाद, अहिरी, घुंसी, पकरिया, देवरिया, गरदहा, रसूलपुर, मोहम्मदपुर, अमीन नगर, अमरतापुर, गुलरिया, मूड़ा सवारान, लखरावां, रसूल पनाह, हैदराबाद ,गणेशपुर, धिरावां, अल्लीपुर सहित मुस्लिम बाहुल्य गांव और मढिया, दौलतपुर, बबक्कर पुर, रजवापुर, मूड़ा खालसा यादव बाहुल्य गांव माने जाते हैं। इन मुस्लिम और यादव बाहुल्य गांव का मतदाता एकजुट दिखा, लेकिन राजनीतिक हालात किस करवट बैठे हैं। इसको देखते हुए अल्पसंख्यक मतदाताओं ने खुलकर बोलने की बजाय वोट से चोट की। जातीय ध्रुवीकरण के तराजू में झूलता यह इस चुनाव का ऊंट किस करवट बदलेगा यह तो 10 मार्च को पता चलेगा, लेकिन सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर रही।
कस्ता में सपा और भाजपा में काटे की टक्कर
मितौली। 143 सुरक्षित सीट कस्ता में भाजपा और सपा के बीच सीधी जंग देखने को मिल रही है। इस सीट से भाजपा ने मौजूदा विधायक सौरभ सिंह सोनू पर एक बार फिर से दांव लगाया है, जबकि सपा ने पूर्व विधायक सुनील कुमार लाला को अपना उम्मीदवार बनाया है। बसपा और कांग्रेस के प्रत्याशी नए हैं, लेकिन वह भी अपनी जीत दावा कर रहे। माना जा रहा है कि हार-जीत का अंतर कम रहेगा।
भाजपा को क्षत्रिय, ब्राम्हण, कुर्मी वोट व पिछड़ी जातियों के मतदाताओं ने वोट किया है। वहीं भाजपा प्रत्याशी के जाटव समुदाय के होने की वजह से बसपा के जाटव वोटर में भी सेंधमारी की है। भाजपा को जहां पार्टी का कैडर वोट और जातीय समीकरण के आधार पर जीत का भरोसा है, वहीं सपा मुस्लिम, सिख और पिछड़ों के भरोसे जीत का दावा कर रही है। जातीय ध्रुवीकरण का भी असर यहां देखने को मिला है, जिससे भाजपा और सपा में कांटे की टक्कर है।
भाजपा को ब्राम्हण बाहुल्य दतेली, ढहर,कल्लुआमोती व कुर्मी बाहुल्य पकरिया, खुर्दा, कल्लीया व क्षत्रिय बाहुल्य लल्हौआ, तेंदुआ, ढ़खौरा में कमल खिलने का भरोसा है, जबकि सपा मुस्लिम, यादव, सिख समुदाय का जमकर वोट मिलने का दावा कर रही है। सपा प्रत्याशी सुनील कुमार लाला पासी और पिछड़े वर्ग समेत सवर्णों के भी वोट मिलने का दावा कर रहे हैं। इसके अलावा सपा सर्वण वोट मिलने का दावा कर रही है। सपा को मुस्लिम बाहुल्य अछनिया, कस्ता, रारी, मितौली, औरंगाबाद, भुलनपुर, मलीगवा व यादव बाहुल्य ककरहा, भगौतीपुर, ढाखा व पासी बाहुल्य भावदा, विशोखर, पैला में सपा को जमकर वोट मिला है। वही बसपा की हेमवती राज को जाटव समुदाय का जमकर वोट मिला है। बसपा भी कई बूथों पर लड़ती नजर आई है और जीत का दावा कर रही है। वहीं काग्रेस के राधेश्याम भार्गव भी कांग्रेस की खोई साख जुटाते नजर आ रहे हैं। और अपनी जीत का दावा कर रहे है। कुल मिलाकर कस्ता विधानसभा में असली लड़ाई सपा और भाजपा के बीच में ही देखने को मिल रही है।
धौरहरा में भी दिखी कांटे की टक्कर, एकपक्षीय हो सकता है नतीजा
धौरहरा। धौरहरा विधानसभा सीट पर इस बार सबसे ज्यादा मतदान हुआ है, जिससे यहां भाजपा और सपा की कांटे की टक्कर है। चूंकि पिछली बार मोदी लहर में भाजपा के पक्ष में चुनाव गया था। ऐसे में पिछले बार के वोट प्रतिशत से काफी अंतर होने से इस बार सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर के बीच चुनाव परिणाम एकपक्षीय भी हो सकता है। क्योंकि, पिछली बार के मुकाबले यहां वोट प्रतिशत काफी अधिक दिख रहा है। उधर, यहां भी मुस्लिम वोट एक पक्षीय सपा के खाते में जाते दिखा।
भाजपा से जहां ब्राह्मण प्रत्याशी के तौर पर विनोद अवस्थी मैदान में हैं, तो बसपा प्रत्याशी और भाजपाई रहे आनंद मोहन त्रिवेदी भी बसपा के कोर वोटर के साथ ब्राह्णण मतदाता साध रहे हैं। ऐसे में दलित, कुर्मी और मुस्लिम बहुल सीट में सपा ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी है। सपा प्रत्याशी वरुण सिंह चौथरी जहां रेहुआ, रसूलपुर, हरदी, भवापुर कला, बिलवा, सरजूनगर, सिसैया, देवीपुरवा गांव समेत मुस्लिम और दलित गांव के वोट अपने पक्ष में होने का दावा कर रहे हैं। तिकुनिया कांड में मारे गए नक्षत्र सिंह के गांव नामदारपुरवा समेत सिख बहुल टॉपरपुरवा, लहबड़ी, लालजीपुरवा, व बेहनन पुरवा में सपा प्रत्याशी की बढ़त दिख रही है। उधर, भाजपा प्रत्याशी विनोद अवस्थी बजहा, करौहा, वाली संकल्पा, पहाड़िया पुर, तुलसीराम पुरवा व ब्राह्मण बहुला क्षेत्रों में अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, जबकि बसपा प्रत्याशी मोहन त्रिवेदी गृह निवास पंडित पुरवा समेत अन्य गांव व बसपा का कोर वोटर अपने साथ में जुड़ने का दावा कर रहे हैं, लेकिन वोट प्रतिशत बढ़ने से साफ है कि सपा और भाजपा में चुनाव परिणाम एक पक्षीय हो सकता है और जीत का अंतर भी बढ़ सकता है।
मोहम्मदी : सपा- भाजपा में रही कांटे की टक्कर
लखीमपुर खीरी। विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में बुधवार को जिले में वोट डाले गए। जिले की मोहम्मदी विधानसभा में चार प्रमुख दल सहित कुल छह प्रत्याशी मैदान में ताल ठोंक रहे थे। हालाकिं मुकाबला सत्तारूढ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल सपा में देखने को मिला। दोनो प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली।
इस विधानसभा में भाजपा से लोकेंद्र प्रताप सिंह, सपा से दाउद अहमद, बसपा से शकील अहमद, कांग्रेस से रीतू सिंह एवं आप से रविकांत, एक्शन पार्टी से अनुराग एम सारथी सहित निर्दलीय रूपराम मैदान में हैं। मतदान के दौरान जो रूझान देखने को मिले उससे भाजपा और सपा के बीच ही कांटे की टक्कर देखने को मिली। मुस्लिम बहुल इलाकों में सरपट साइकिल दौडी तो वहीं अन्य क्षेत्र कमल खिला। वहीं बसपा को भी कैडर वोट धीमी रफ्तार से मिल्रता था। जबकि अन्य प्रत्याशी भी सेंधमारी करते नजर आए।
मोहम्मदी में सपा से मुस्लिम प्रत्याशी होने के कारण भाजपा प्रत्याशी को सीधी टक्कर मिलती दिख रही है। ऐसे में सीधा मुकाबला सपा और भाजपा में नजर आ रहा है। हालांकि यहां भी ध्रुवीकरण की स्थिति दिखने को मिली है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और सीएम योगी की रैली में उमड़ा जनसैलाब ने भाजपा प्रत्याशी को ऑक्सीजन देने में काम किया है। फिर भी दोनो के बीच टक्कर जबरदस्त है। सपा, बसपा के मुस्लिम प्रत्याशी होने के बावजूद मुसलिम मतदाताओं का सपा की ओर रुझान दिखा। सपा का दावा है कि उसे मुस्लिम बहुल इलाकों में 82 प्रतिशत तक वोट मिले हैं, जबकि भाजपा को मुस्लिम छोड़कर हर वर्ग से वोट मिलने का भरोसा है। ऐसे में यहां भी भाजपा और सपा के बीच नाक की लड़ाई है।
श्रीनगर में कांटे का मुकाबला, कौन बनेगा सिकंदर, चर्चाओं का बाजार गर्म
लखीमपुर खीरी। विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दौरान भाजपा और सपा में कांटे का मुकाबला दिखाई दिया। सपा के वोट में बसपा की कुछ सेंधमारी जरूर रही लेकिन बसपा का कैडर वोट के बटवारे ने मुकाबले को और कड़ा कर दिया। पिछले चुनाव में श्रीनगर में भारतीय जनता पार्टी की मंजू त्यागी चुनाव जीत कर विधायक बनीं थी। इस बार उनके सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती थी। इस बार यहां से कौन विधायक बनेगा यह तो 10 फरवरी को ही पता चलेगा लेकिन मतदान सीधा मुकाबला नजर आया। मुस्लिम बहुल इलाकों में जहां सपा मजबूती से लड़ती नजर आई वहीं सवर्ण बहुल क्षेत्र में मजबूत दिखाई पड़ी। बसपा और कांग्रेस वोटकटवा की भूमिका में नजर आए।
वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा की मंजू त्यागी 112941 वोट पाकर विजयी रही थीं। जबकि समाजवादी पार्टी की मीरा बानो 58002 वोट पाकर रनर रहीं थी। पिछले चुनाव में मीरा बानो सपा और कांग्रेस गठबंधन से मैदान में थीं जबकि इस बार मीरा बानो बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। सपा के रामसरन और भाजपा की मंजू त्यागी के इस बार रोचक मुकाबला दिखाई दिया। मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
बसपा के कैडर वोट में भाजपा और सपा दोनों ने ही सेंध लगाई है। इससे भाजपा और सपा दोनों ही अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं। फिलहाल श्रीनगर क्षेत्र में मतदान निबटने के बाद लोग देर रात तक चर्चाओं का दौर जारी रहा और लोग जीत हार की गणित लगाते रहे।