नवाबगंज। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर बुधवार तड़के हादसे में जान गंवाने वाले डॉ नरदेव गंगवार नवाबगंज कस्बे के चाणक्यपुरी मोहल्ले के निवासी थे। परिजन उनकी शादी के लिए रिश्ता देख रहे थे। वह दीपावली पर घर आए थे। तब भाई यज्ञदेव की दुकान के उद्घाटन में भी शामिल हुए थे। वह सैफई मेडिकल कॉलेज से पीजी करने के बाद कस्बे में अस्पताल खोलकर लोगों की सेवा करना चाहते थे, लेकिन यह सपना अधूरा रह गया।
हादसे की सूचना पहुंचते ही चाणक्यपुरी मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया है। डॉ. नरदेव के पिता सेवानिवृत दरोगा रामलखन गंगवार ने बताया कि इस हादसे ने उनके परिवार के सपने को चकनाचूर कर दिया। तीन भाइयों में डॉ. नरदेव सबसे छोटे थे। उनसे बड़े डोरीलाल और यज्ञदेव हैं। दोनों दुकान चलाते हैं। उनकी एक बहन शकुंतला भी हैं। उनकी मां यशोदा देवी और भाभी सुमन शिक्षामित्र हैं।
पिता के मुताबिक, नरदेव बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे। नवदिया गांव से प्राथमिक पढ़ाई की थी। श्री कृष्ण इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और इंटर पास करने के बाद वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कानपुर चले गए थे। छठवें प्रसास में नीट पास किया था। संवाद