अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। पांच दिन तक पंडालों की शोभा बढ़ा रही रहीं दुर्गा प्रतिमाएं शुक्रवार को विदा हो गई। बंगाली समाज की महिलाआें ने एक दूसरे के साथ सिंदूर खैला की रस्म अदा की। फिर ढाक की थाप पर धुनुचि के साथ नृत्य करते हुए प्रतिमाआें को रामगंगा नदी में विसर्जित किया गया। इस मौके पर आस्ची बाछौर अबार हाबे...यानी अगले बरस फिर होगा के नारे भी लगाए गए।
इस मौके पर युवाआें ने गुलाल खेला। ढाकी भी खूब मस्त होकर ढाक बजाते रहे। कांसा (घंटा) की धुन इसमें साथ देती रही। कदमों को मिलाते हुए ग्रुप में डांस करते हुए रामगंगा तक गए। रामपुरबाग के दुर्गा बाड़ी, जंक्शन के मनोरंजन सदन, चौपुला की रेलवे कालोनी, कैंट बीआई बाजार और इज्जतनगर से एक साथ शोभायात्रा के रूप में प्रतिमाएं घाट को पहुंची। विसर्जन के बाद लौटकर आए श्रद्धालुआें ने पंडालों में शांति जल रस्म में भाग लिया। पंडाल में देवी का आह्वान किया गया था, वहां इस शांति जल से पूजा करने के बाद शांति जल सभी भक्ताें पर छिड़का गया। जंक्शन बंगाली एसोसिएशन की पूजा में पीबी रॉय, यूके मित्रा, यूके मोइत्रा, अर्जुन चंपामणि, आशिम बनर्जी, सतीश रावत, चंचल डे, शिमला मोइत्रा, श्यामल मित्रा, शिवेश डे, संजय दास, पीके तिक्कादार, मनोज राय व मीडिया प्रभारी ध्रुव चटर्जी का सहयोग रहा। दुर्गाबाड़ी में सोमित मुखर्जी, एसके मुखर्जी, एस राय चौधरी, एम भद्रा, पंकज बोस, देवाशीष दत्ता का सहयोग रहा। रेलवे कालोनी में एसके बनर्जी, तरुण राउथ व अन्य का सहयोग रहा। कैंट बीआई पूजा में टीएम सरकार, सुबोध कार व अन्य का सहयोग रहा।