केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन योजना के द्वितीय चरण की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। प्रथम चरण में पिछड़ने के बाद बरेली को द्वितीय चरण में शामिल कराने के लिए बड़े स्तर पर माथापच्ची हो रही है। राज्य सरकार और नगर निगम ने द्वितीय चरण में स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट बनाने के लिए हैदराबाद की दाराशा प्राइवेट लिमिटेड पर दांव लगाया है। इस एजेंसी की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रथम चरण में सूरत और बेलगावी शहर चयनित हो चुके हैं। इसलिए बरेली को भी एजेंसी के सर्वे से नई उम्मीद जगी है। नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव ने बताया कि गुजरात के शहर सूरत को स्मार्ट बनाने का प्रपोजल बनाने वाली हैदराबाद की एजेंसी को बरेली का प्रोजेक्ट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन से इसकी अनुमति मिल गई है। एजेंसी प्रतिनिधि 10 दिन के अंदर बरेली आकर स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट पर नए सिरे से काम शुरू करेंगे। 25 अप्रैल तक स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में नागरिकों के सुझावों को शामिल किए जाएंगे। 26 से 30 अप्रैल तक स्मार्ट सिटी के लक्ष्य और उसमें किए जाने वाले कामों की रुपरेखा बनाई जाएगी। 20 मई तक स्मार्ट सिटी का प्रपोजल डेवलप किया जाएगा। 21 से 30 मई तक एरिया बेस्ड डेवलपमेंट और पैन सिटी साल्यूशन पर काम होगा। 31 मई से 10 जून तक स्मार्ट सिटी के फाइनेंशियल प्लान को अंतिम रुप दे दिया जाएगा। 11 से 15 जून तक राज्य की मानीटरिंग कमेटी स्मार्ट सिटी प्रपोजल की समीक्षा करेगी। 16 से 20 जून तक प्रपोजल ऑनलाइन अपलोड कर दिया जाएगा। स्मार्ट सिटी का प्रपोजल 25 जून तक केंद्र को भेजना है।
स्मार्ट सिटी पर आईआईए ने रखे सुझाव
फोकस रामगंगानगर और पीलीभीत बाईपास पर
केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन में प्रथम चरण में असफल रहने के बाद दूसरे चरण में बरेली को स्थिान दिलाने के लिए नगर निगम ने पब्लिक की रायशुमारी के लिए सबसे पहले इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के सदस्यों को बुलाया। उद्यमियों ने पहले शिकायत दर्ज करायी कि प्रथम चरण में तो सुझावों को प्रोजेक्ट में जगह नहीं मिली। अब फिर बुलाया है तो हमारे सुझावों को प्रोजेक्ट में शामिल जरूर करें।
महापौर डा. आईएस तोमर की अध्यक्षता में हुई स्मार्ट सिटी परिचर्चा में आईआईए उद्यमियों को फाइनेंशियल एक्सपर्ट विनय कुमार ने एरिया बेस्ड डेवलपमेंट, पेन सिटी प्रपोजल और सिटीजन कंसल्टेंशन के बारे में जानकारी दी। उद्यमियों से अपने विचार 25 फरवरी तक नगर निगम को उपलब्ध कराने को कहा गया। आईआईए के सुरेश सुंदरानी ने कहा कि स्मार्ट सिटी के प्रथम चरण के सर्वे में भी उद्योग बंधुओं से विचार विमर्श किया गया था लेकिन उनके सुझाव प्रोजेक्ट में शामिल नहीं किए गए। नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव ने कहा कि उद्यमियों से परिचर्चा को कंसल्टेंट प्रतिनिधियों ने प्रपोजल में शामिल नहीं किया था। द्वितीय चरण में उद्यमियों के सुझाव अवश्य शामिल किए जाएंगे। घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि प्रथम चरण में ग्रीन फील्ड डेवलपमेंट के लिए रामगंगा नगर आवासीय योजना में छोटे और कुटीर उद्योगों के लिए स्थल चिह्नित किए गए थे लेकिन उनकी जमीन महंगी दरों पर उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान था। द्वितीय चरण में इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। भारत भूषण शील ने कहा कि उद्यमियों को सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराई जाए। मेयर डा. आईएस तोमर ने पूछा- क्या ग्रीन फील्ड डेवलपमेंट पर काम किया जाना है। इसके लिए कौन सा एरिया चिह्नित किया जाए। उद्यमियों ने रामगंगा नगर आवासीय योजना को सबसे उपयुक्त बताया।
सेटेलाइट से बैरियर टू तक रेट्रोफिटिंग
आईआईए पदाधिकारियों आरके गोयल, नीरज गोयल, मनोहरलाल धीरवानी आदि ने सेटेलाइट से बीसलपुर रोड, रुहेलखंड विश्वविद्यालय समेत पीलीभीत बाईपास रोड की कालोनियों को शामिल करते हुए बैरियर टू तक रेट्रोफिटिंग के माध्यम से नए सिरे से विकसित करने का सुझाव रखा। द्वितीय चरण में स्मार्ट सिटी के जो भी प्रस्ताव बनाए जाएंगे, उनको क्रियान्वित करने के लिए अनुबंध प्रक्रिया भी पहले से ही पूरी की जाएगी। बैठक में मेयर, नगर आयुक्त के अलावा अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. अशोक कुुमार, एक्सईएन सतीश कुमार, पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार शामिल थे।