बरेली। आखिर इतिहास बदल गया और तीन तलाक देखते-देखते गुजरी बात हो गई। राज्यसभा में सुबह तीन तलाक बिल बहस शुरू होते ही सैकड़ों निगाहें टेलीविजन पर लग गईं। बिल पास होना हालांकि तय था, लेकिन फिर भी बहस खत्म होने तक पीड़िताओं में एक अजीबोगरीब बेचैनी कायम रही और आखिर में जैसे ही बिल पास होने की घोषणा हुई, तीन तलाक पीड़िताओं के चेहरों पर खुशियां बरसने लगीं। एक-दूसरे को बधाइयां देने का दौर शुरू हो गया और मिठाइयां बंटने लगीं। देर रात तक जमकर जश्न मना। मुस्लिम औरतों ने फोन पर भी एक-दूसरे को बधाई दीं। तीन तलाक और हलाला पर आवाज उठाने वाली महिलाओं ने कहा कि अब मुस्लिम समाज की औरतें भी बेखौफ होकर जिंदगी जिएंगी। उन पर जुल्म करने से पहले पुरुष सौ बार सोचेंगे। वह अगर उन्हें बर्बाद करेंगे तो अब उनकी खुद की भी जिंदगी बर्बाद होने से बचेगी नहीं।
तीसरी शादी करने वाले ने भी दे दिया तीन तलाक
जुल्मी पुरुषों को अब कानून सुधारेगा
गौंटिया एजाज नगर की शबनम उर्फ शबीना का निकाह 16 मार्च 2015 को हजियापुर के सकलैन नगर में रहने वाले इसरार के साथ हुआ था। शबनम के माता-पिता नहीं हैं। उनसे निकाह से पहले भी इसरार दो शादी कर चुका था। शबनम को भी उसने कुछ ही दिनों बाद प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। आए दिन मारपीट से तंग आकर शादी के एक साल बाद ही शबनम ने किराए का एक कमरा लेकर इसरार से अलग रहना शुरू कर दिया। गुजारे के लिए कारचोबी करने लगी तो इसरार ने उससे पैसे मांगने शुरू कर दिए। शबनम का आरोप है कि इसी रविवार को दोपहर करीब ढाई बजे उसके पास पहुंचे इसरार ने उन्हें धमकी दी कि अगर वह उसे पैसा नहीं देंगी तो वह उसे तलाक दे देगा। उसने पैसे देने से इनकार किया तो इसरार ने पहले तो तीन तलाक दिया। फिर उन्हें जबरन कचहरी ले जाकर स्टांप पर अंगूठा भी लगवा लिया। शबनम को धमकी दी कि दूसरी शादी या कानूनी कार्रवाई करने पर वह उन्हें जान से मार देगा। शबनम कहती हैं कि उनके साथ जो हुआ वो हुआ, लेकिन उन्हें इस बात की काफी खुशी है कि अब ऐसा किसी और के साथ नहीं होगा।
फोन पर किया सलाम, जवाब में मिला तीन तलाक
अब खौफ के साये से बाहर निकलेंगी औरतें
सीबीगंज में रहने वाली रानी राशिद का निकाह 26 अप्रैल 2013 को डेलापीर के शानू अली से हुआ था। रानी का कहना है कि उन्होंने शादी के समय बीए फर्स्ट ईयर पास किया था। रिश्ता तय होते वक्त उन्होंने आगे पढ़ने की बात कही तो शानू और उसके घरवालों ने हामी भर दी थी। मगर शादी के बाद ससुराल वालों ने रानी को आगे पढ़ाने से इनकार कर दिया। उल्टे शानू के सऊदी अरब चले जाने के बाद उन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा। सऊदी से लौटने के बाद शानू ने पांच सितंबर 2016 को रानी को मोबाइल पर फोन किया। रानी के सलाम के जवाब में शानू ने तीन बार तलाक कहकर फोन काट दिया। रानी ने कोर्ट में गुजारे के लिए केस किया जिसमें बाद में समझौता हो गया। रानी ने बताया कि शानू अली बसपा नेता मो. यूसुफ का छोटा भाई है। रानी ने कहा कि तीन तलाक कानून मुस्लिम महिलाओं के हक में बेहतर फैसला साबित होगा। अब उन्हें तीन तलाक का डर नहीं सताएगा।
देवर से नहीं किया हलाला तो घर से निकाला
अपने हक की लड़ाई लड़ने का मिला हथियार
रिछा में रहने वाले जलील अहमद की बेटी अर्शी का निकाह 31 मार्च 2012 को बहेड़ी के लईक उर्फ भूरा के साथ हुआ था। अर्शी के मुताबिक लईक शराबी और जुआरी है। उन्होंने विरोध किया तो घर में झगड़ा होने लगा। निकाह के कुछ महीने बाद लईक मायके से कार या कार खरीदने के लिए पैसे लाने को कहने लगा। उनके मना करने पर पिटाई करता था। अर्शी के मुताबिक 11 जून 2015 को लईक शराब पीकर घर पहुंचा और कार खरीदने के लिए रकम लाने को कहने लगा। उनके मना करने पर तीन तलाक दे दिया। वह सदमे में रात भर रोती रहीं। सुबह होने पर अर्शी ने अपनी सास को पूरी बात बताई तो सास ने घर में रखने के बदले में देवर से हलाला करने की शर्त रख दी। अर्शी हलाला करने से इनकार कर मायके चली गईं और तबसे मायके में ही रह रही हैं। अर्शी ने कहा कि तीन तलाक कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ मिलेगा। अब तक जो डर-डर जी रही थीं उनकी हिम्मत बढ़ेगी और अपने हक की लड़ाई लड़ सकेंगी।
पति ने तलाक देकर अब्बा से कराया हलाला
हलाला की शर्मिंदगी झेलने का दौर खत्म हुआ
किला इलाके की रहने वाली एक तलाक पीड़िता का निकाह जुलाई 2009 में प्रेमनगर इलाके के सुर्खा बानखाना में रहने वाले एक युवक से हुआ था। पीड़ित ने बताया कि शादी के बाद संतान नहीं हुई तो ससुराल वाले प्रताड़ित करने लगे। बार-बार तलाक की धमकी दी जाती थी। उनका पति दूसरी महिलाओं से संबंध रखता था। पिता न होने की वजह से वह पति के जुल्म सहती रहीं। फिर भी 15 फरवरी 2015 को पति ने उन्हें तीन तलाक दे दिया गया। वह ससुराल वालों के साथ गिड़गिड़ाईं तो ससुर के साथ हलाला की शर्त रख दी गई। जबरन ससुर से हलाला कराया गया फिर पति से दोबारा निकाह हुआ, लेकिन उसने उन्हें दोबारा तलाक दे दिया। उन्हें कई दिन कमरे में बंद कर भूखा-प्यासा रखा। खुशामद करने पर देवर के साथ हलाला की शर्त रख दी। पीड़ित राजी नहीं हुई तो मायके भेज दिया गया। वह कहती है कि तीन तलाक कानून बनने से महिलाओं को इंसाफ मिलेगा। उन्हें हलाला की शर्मिंदगी झेलने से भी निजात मिलेगी।