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औरतों को मिलेगा इंसाफ और दरिंदों को सजा

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बरेली। आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनने पर खुशी जताते हुए कहा कि जिन महिलाओं ने तीन तलाक की लड़ाई लड़ी, उनके लिए यह एक बड़ी जीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने की इच्छा देखकर ही मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में वोट दिया। प्रधानमंत्री ने भी मुस्लिम महिलाओं से किया वायदा अब पूरा कर दिया है। निदा ने कहा कि सती प्रथा की तरह तीन तलाक भी मुस्लिम समाज की बड़ी कुप्रथा थी जो अब खत्म हो गई है। तीन तलाक कानून एक इंसानियत से जुड़ा मुद्दा है जिसका उन्होंने खुलकर समर्थन किया। चूंकि तीन तलाक देने का हक सिर्फ मर्दों को था इसलिए मुस्लिम औरतें घरों में डरी-सहमी रहती थीं। खौफ रहता था कि जाने कब और किस बात पर उन्हें तलाक दे दिया जाए। उन्होंने कहा कि पहले तीन तलाक के मामले आए दिन सामने आते थे। मगर तीन तलाक कानून की चर्चा होने के बाद ये मामले काफी घट गए। अब लोग तीन तलाक बोलने से डरेंगे। औरतों को तीन तलाक और हलाला से तड़पाने वाले दरिंदों को सजा मिलेगी। कानून बनने से ज्यादा जरूरी है कि सजा हो। निदा का कहना है कि अगर यही कानून तीन-चार साल पहले बन गया होता तो उनका भी शीरान से तलाक नहीं होता। निदा ने कहा कि अगर तीन तलाक के पुराने मामले इस कानून के दायरे में आएंगे तो वह भी शीरान के खिलाफ केस दर्ज कराएंगी।
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