बरेली। कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में पंचशूल गनर्स की ओर से कैंट किला स्थित मैदान में हथियारों की प्रदर्शनी लगाई। जवानों ने विद्यार्थियों को तकनीक के प्रयोग से सटीक निशाना लगाने की जानकारी दी। विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए।
ब्रिगेडियर गौतम पठानिया ने प्रदर्शनी का निरीक्षण कर मौजूद कई स्कूलों के विद्यार्थियों का जोश बढ़ाया। कारगिल युद्ध के नायकों के साहस, बलिदान, वीरता के बारे में भी जानकारी दी। छात्रों ने सेना के आधुनिक हथियारों को करीब से देखा। जवानों से आर्टिलरी इक्विपमेंट्स, संचार उपकरण और वायु रक्षा प्रणालियों के बारे में जानकारी ली। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी शांतनु ने बताया कि 11 स्कूलों के 1,325 विद्यार्थी, 71 शिक्षक प्रदर्शनी देखने पहुंचे थे।
दुश्मनों को भटकाती है जंपिंग बाउंसर तोप
पश्चिमी एशिया में युद्ध के दौरान दुश्मनों को धोखा देने के लिए प्रयोग की गई छद्म तोप की तर्ज पर अब सेना ने भी जंपिंग बाउंसर तोपें तैयार की हैं। ये तोपें प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र रही। सीमाओं पर ऐसी तोप रखते हैं जो दूर से या ऊंचाई से देखने पर असली नजर आती है। दुश्मन के हमले से कोई नुकसान तो नहीं होता पर उनके आयुध बेकार जाते हैं और जवाबी हमला भी आसान होता है।
ड्रोन और रडार से हो रही सीमा की निगरानी
जवानों ने बताया कि अब सीमा की निगरानी 15 किमी रेंज वाले ड्रोन से की जाती है। ऊंचाई पर उड़ने व बेहद हल्की आवाज होने से इसकी भनक दुश्मनों को नहीं लगती। रडार सिस्टम 15 किमी तक राहगीर, 18 किमी तक समूहों में मौजूद लोग, 25 किमी तक ऊंचाई पर उड़ने वाले हेलिकॉप्टर, 40 किमी तक भारी वाहनों की आवाजाही पकड़ने में समक्ष है।
प्रदर्शनी में हथियारों संग बुलडोर भी रहा शामिल
युद्ध क्षेत्र में प्रयोग होने वाला स्किड स्टीयर लोडर (जेसीबी) भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहा। साथ ही, डूअल टेक्नोलॉजी माइन डिटेक्टर, केमिकल बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर किट, रेडियो फ्रीक्वेंसी सिस्टम, थर्मल इमेजिंग इंटीग्रेटेड ऑब्जर्वेशन इक्विपमेंट, लाइट फील्ड गन, एमके-3, मोर्टार, नेजिव एलएमजी, असॉल्ट व इंसास राइफल समेत अन्य कई हथियार प्रदर्शित किए गए।