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बरेली बवाल प्रकरण: प्रॉपर्टी डीलर राजीव राणा ने बढ़ाई मुश्किल, निलंबित इंस्पेक्टर पर और कसेगा शिकंजा

Tue, 25 Jun 2024 03:18 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

पीलीभीत बाइपास के किनारे प्लॉट पर कब्जे को लेकर हुए बवाल के बाद निलंबित इंस्पेक्टर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आरोपी राजीव राणा ने इंस्पेक्टर को लेकर ऐसा बयान दिया, जिससे इंस्पेक्टर पर शिकंजा कसता है। 
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निलंबित इंस्पेक्टर जयशंकर सिंह, आरोपी राजीव राणा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली के पीलीभीत बाईपास किनारे प्लॉट पर कब्जे को लेकर हुए बवाल के बाद वायरल वीडियो में प्रॉपर्टी डीलर राजीव राणा ने इज्जतनगर थाना प्रभारी रहे इंस्पेक्टर जयशंकर सिंह को निर्दोष बताया है। इससे निलंबित हुए जयशंकर सिंह की परेशानी और बढ़ सकती है।

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राणा के मुताबिक इंस्पेक्टर ने कहा था कि आप जाकर कब्जा लो, बाकी हम देख लेंगे। इससे भूमि पर कब्जा लेने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इसके लिए बाकायदा फीस जमा करके कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है। वीडियो बयान में कई ऐसे झोल हैं जो खुद राजीव की भी परेशानी बढ़ा सकते हैं। 

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मसलन, उसके पास कब्जा करने के वैध आदेश थे। इन्हें लेकर वह इंस्पेक्टर के पास पहुंचा। वहां इंस्पेक्टर ने कह दिया कि आपके कागज सही हैं। आप जाकर कब्जा ले लो, कोई दिक्कत होगी तो हम देख लेंगे। पुलिस भी मौके पर थी। 

कब्जा शांतिपूर्वक तरीके से लिया जा रहा था पर दूसरे पक्ष ने अचानक फायरिंग करके माहौल खराब कर दिया। इस लिहाज से देखा जाए तो राजीव अपने वीडियो बयान में जहां खुद फंस रहा है, वहीं इंस्पेक्टर की गर्दन फंसाने का भी इंतजाम कर दिया है।

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ये है कब्जा लेने का वैध तरीका 
सिविल मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव शंखधार ने बताया कि न्यायालय अपने आदेश में कब्जा करने वाले को कब्जा छोड़ने के लिए एक निश्चित समय देता है। यदि वह समय निकल जाता है तो न्यायालय द्वारा कब्जा लेने के लिए निष्पादन वाद दायर किया जाता है। 

निष्पादन वाद के माध्यम से न्यायालय अमीन और पुलिस की सहायता से वादी डिग्रीधारी को दखल दिलाता है। पुलिस सहायता लेने के लिए डिग्रीधारक को फीस भी जमा करनी पड़ती है। कब्जा दिलाने के बाद अमीन इसकी सूचना न्यायालय को देता है। 
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