नाग पंचमी पर नाग देवता के दर्शन कराने नहीं निकले सपेरे
बरेली। नाग पंचमी श्रद्धा के साथ परंपरागत ढंग से मनाई गई। घरों में महिलाओं ने रसोई के द्वार पर कोयले से नाग देवता की आकृति बनाकर उनकी पूजा की। सेवई (जवा) से भोग लगाया। इसके साथ घरों में जवा तोड़ने की शुरूआत हो गई।
नागपंचमी पर नाग देवता के दर्शन कराने के लिए इस बार सपेरे नहीं निकले। मंदिरों के बाहर भी सपेरे नहीं दिखे। दरअसल, पिछले वर्षों में कुछ सपेरों के खिलाफ वन विभाग ने कार्रवाई की थी। सांप भी जंगल में छुड़वा दिए थे, लिहाजा ज्यादातर सपेरों ने कोर्ट, कचहरी और पुलिस के झंझट की वजह से पेशा छोड़ दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने सांपों की बांबी में दूध रखकर नाग देवता से परिवार सहित सुरक्षित रखने की प्रार्थना की। जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष था, उन लोगों ने शिव मंदिरों में पूजा की। चांदी के बने सर्प के जोड़े शिवलिंग पर अर्पित किए। सर्पदंश और विष के भय से मुक्ति के लिए नाग देवता से प्रार्थना की।