अप्रैल 2014 में नवाबगंज के गांव चेना में हुई थी सनसनीखेज वारदात
बाइक की टक्कर लगने के बाद गुप्तियों से किया था परिवार पर हमला
बरेली। मोटर साइकिल की हल्की सी टक्कर लगने की मामूली सी बात पर नवाबगंज के गांव चेना में छोटे लाल, उनके बेटे वीरेंद्र और बेटी नीरज की घर में घुसकर धारदार हथियारों से हत्या कर देने के मामले में अदालत ने छह अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा पाने वालों में एक महिला और उसके दो बेटे भी शामिल हैं।
यह सनसनीखेज हत्याकांड 12 अप्रैल 2014 को हुआ था। इसकी रिपोर्ट घायल छोटे लाल ने ही थाना नवाबगंज में दर्ज कराई थी, हालांकि बाद में उनकी भी मौत हो गई। रिपोर्ट में छोटे लाल ने कहा था कि 12 अप्रैल 2014 की शाम करीब पांच बजे उनका 25 वर्षीय बेटा वीरेंद्र पाल गंगवार सब्जी खरीदकर गांव लौट रहा था। उनके घर के पास ही वीरेंद्र की बाइक गांव के ही मुकेश और सूरजपाल से छू गई। वीरेंद्र ने उनसे माफी मांगी लेकिन वे दोनों उससे गालीगलौज करते हुए अपने घर चले गए।
कुछ ही देर बाद मुकेश और सूरजपाल गुप्ती लेकर दोबारा लौटे। उनके साथ हाथों लाठी-डंडे लिए उनकी मां लौंगश्री, नाना केसरी लाल, मामा शंभुदत्त और धर्मपाल भी थे। सूरज ने आते ही उनके बेटे वीरेंद्र की पीठ में गुप्ती भोंक दी। बेटी कमलेश उसे बचाने पहुंची तो सूरजपाल ने उसके भी पेट में गु्प्ती भोंक दी। मुकेश ने उनकी दूसरी बेटी नीरज की पीठ में गुप्ती भोंकी। इसी बीच वह पहुंचे तो मुकेश ने उन पर भी गुप्ती से हमला कर दिया।
घटना के बाद परिवार के लोग सभी घायलों को लेकर अस्पताल पहुंचे। वीरेंद्र और नीरज की नवाबगंज के सरकारी अस्पताल में मौत हो गई। छोटे लाल और उनकी दूसरी बेटी कमलेश को जिला अस्पताल भेजा गया जहां छोटे लाल ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अभियोजन की ओर से इस मामले में 14 गवाह पेश किए गए। कोर्ट ने अभियुक्त मुकेश, सूरजपाल, लौंगश्री, केसरी लाल, शंभुदत्त और धर्मपाल को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। हर एक पर 74 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
सभी आरोपी रिश्तेदार
घटना के मुख्य अभियुक्त मुकेश और सूरजपाल लौंग श्री के बेटे हैं। इसके अलावा केसरी लाल लौंगश्री के पिता और शंभु दत्त और धर्मपाल उसके भाई हैं।