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बचपन में जहां खेले सिमरन में उस मिटटी को चूमा

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बहेड़ी में सिमरन व उसके नाना ने ताऊ को किया सम्मानित। - फोटो : BAHERI
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बरेली। हॉकी में भारत को 41 साल बाद ओलंपिक पदक दिलाने वाले स्टार खिलाड़ी सिमरनजीत सिंह सोमवार को बहेड़ी के गांव सिमरा रिछोला स्थित अपनी ननिहाल पहुंचे। सिमरनजीत सिंह सबसे पहले उस खेत पर पहुंचे, जहां वह बचपन में हॉकी की प्रैक्टिस करते थे। उन्होंने खेत को मिट्टी को चूमा और फिर मुट्ठी में लेकर माथे से लगाया। उन्होंने ओलंपिक में ऐतिहासिक जीत का श्रेय देशवासियों के प्यार और आशीर्वाद को दिया। ओलंपिक पदक विजेता टीम का हिस्सा रहे सिमरनजीत सिंह के ननिहाल आने पर सिमरा रिछोला से लेकर बहेड़ी तक जश्न का माहौल रहा। जगह-जगह उनका जोरदार स्वागत किया गया।
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शाम चार बजे गांव पहुंचे सिमरनजीत सिंह ने सबसे पहले उन खेतों का रुख किया जहां बचपन में वह प्रैक्टिस किया करते थे। बचपन के दिनों को याद कर वह भावुक हो गए। खेत में घुटनों के बल बैठकर मिट्टी को मुट्ठी में भर लिया। चूमा और फिर माथे से लगाया। बचपन में साथ खेलने वाले गांव के अपने दोस्तों से भी मिले। ओलंपिक पदक जीतने के बाद पहली बार ननिहाल आने पर परिवार की महिलाओं ने आरती उतारकर उनका स्वागत किया। इसके बाद वह गुरुद्वारा सिंह सभा पहुंचे। उनके आगमन की पहले से ही सूचना मिल जाने से गुरुद्वारे पर भारी भीड़ जुटी हुई थी। उनके सम्मान में रैली निकालने समेत कई कार्यक्रम तय किए गए थे, मगर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन के चलते सभी रद्द कर दिए गए। गुरुद्वारे पर आसपास के लोगों ने उनका सम्मान किया। गुरुद्वारे के प्रधान सरदार निरंजन सिंह ने शॉल ओढ़ाकर स्मृति चिह्न भेंट किया। गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब के डायरेक्टर जुगेंद्र सिंह ने ट्रॉफी भेंट की। बार एसोसिएशन की ओर से भी स्मृति चिह्न दिया गया। राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक कवि आनंद प्रकाश ने कविता सुनाई। सराफा मंडल ने भी उन्हें सम्मानित किया।
देर रात तक की गई आतिशबाजी
सिमरनजीत के आने पर गांव सिमरा रिछोला में उत्सव जैसा माहौल दिखा। सुबह से लेकर देर रात तक लोग जश्न में डूबे रहे। ओलंपिक पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के स्टार खिलाड़ी के स्वागत में देर रात तक आतिशबाजी की गई। बहेड़ी भाजपा विधायक छत्रपाल सिंह भी सिमरनजीत से मिलने पहुंचे।
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सेल्फी लेने की रही होड़
हॉकी में 41 साल के लंबे इंतजार के बाद ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले सिमरनजीत के साथ सेल्फी लेने के लिए होड़ मची रही। शांत स्वभाव के सिमरनजीत सिंह भी हर किसी के साथ सेल्फी खिंचा रहे थे। उनके इस स्वभाव की छोटों से लेकर बुजुर्ग तक तारीफ करते दिखे।
नानी ने बनाए पसंद के पकवान
सिमरनजीत सिंह की नानी सुखवंत कौर ने अपने हाथों से उनकी पसंद की उड़द दाल की कचौड़ी, पनीर की सब्जी और गुलाब जामुन बनाकर खिलाए। नाना दर्शन सिंह ने बताया बचपन से ही सिमरनजीत सिंह को पनीर की सब्जी और कचौड़ियां पसंद हैं। पदक जीतने के बाद पहली बार ननिहाल आगमन पर उन्हें पसंद का खाना मिले, इस बात का खास ख्याल रखा गया।
ताऊ को मंच पर बुलाकर भेंट की तलवार
गुरुद्वारे में आयोजित कार्यक्रम के मंच से सिमरनजीत सिंह ने अपनी इस उपलब्धि में ताऊ जसवंत सिंह के योगदान की भी चर्चा की। सिमरनजीत सिंह के ताऊ खुद हॉकी खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने ही सिमरनजीत का पंजाब खेल अकादमी में दाखिला कराया था। इसके लिए सिमरनजीत ने ताऊ जसवंत सिंह को मंच पर बुलाकर उन्हें तलवार भेंट करके सम्मानित किया।
सपने का सच होना है ओलंपिक पदक जीतना
बहेड़ी। सिमरनजीत ने टोक्यो के अपने अनुभव साझा करने के साथ ही सिस्टम की खामियों पर भी बात की। देश को हॉकी में ऐतिहासिक जीत दिलाने को उन्होंने सपने के सच होने जैसा बताया। कहा, बचपन से ही यह सपना संजोए थे। बोले, बड़े टूर्नामेंट में जीतने पर तो खिलाड़ी चर्चा में रहते हैं इसके बाद देश उन्हें भूलने लगता है। आज भी देश के अधिकांश हिस्सों में खेल की मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इन्फ्रास्ट्रक्चर न होने से खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते हैं। दूसरे देशों के खिलाड़ियों की तुलना में हम मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत हैं, मगर सही ट्रेनिंग न मिलने से पिछड़ जाते हैं। समय पर स्टेडियम नहीं बनते। जो स्टेडियम हैं भी वहां कोच नहीं हैं। राष्ट्रीय खेल होने के बाद भी हॉकी में अभी काफी प्रयास करने की आवश्यकता है। टोक्यो ओलंपिक में जर्मनी के खिलाफ मुकाबले का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, टीम के आपसी तालमेल और पैनी निगाह से जीत हासिल हुई। जर्मनी की टीम कागजों में हमसे मजबूत थी। अगर हम हारते तो 41 साल लंबा इंतजार चार साल और आगे बढ़ना तय था। इस वजह से टीम के कुछ खिलाड़ियों का मनोबल कम हो रहा था। इसके बावजूद टीम ने अपना सर्वस्व झोंक दिया। देशवासियों की दुुआएं भी काम आईं।
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