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खाद की किल्लत: बरेली की सहकारी समितियों पर यूरिया और एनपीके, निजी दुकानों पर लुट रहे किसान

Sat, 05 Oct 2024 11:20 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली जिले में सहकारी समितियों पर खाद की कमी से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ज्यादातर सहकारी समितियों पर यूरिया और एनपीके न मिलने से किसान निजी दुकानों से खाद खरीदने को मजबूर हैं। निजी विक्रेता खाद के दाम अधिक वसूल रहे हैं। 
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नौरंगाबाद सहकारी समिति - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली जिले में अगेती धान की कटाई शुरू होने के साथ ही किसान गन्ने की शरदकालीन बोआई के साथ गेहूं व रबी की अन्य फसलों की तैयारियों में भी जुट गए हैं। अक्तूबर के अंत में होने वाली बोआई के लिए खाद की कमी मुसीबत बनी हुई है। 

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बरेली जिले की 142 साधन सहकारी समितियों में से ज्यादातर पर यूरिया और एनपीके खाद उपलब्ध ही नहीं है। परेशान होकर निजी दुकानों का रुख कर रहे किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर विक्रेता उनपर जिंक सहित अन्य उत्पाद लेने का दबाव बना रहे हैं। दाम भी अधिक वसूले जा रहे हैं।

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सहकारिता विभाग के अधिकारियों का दावा है कि प्रत्येक समिति के लिए 25-25 टन खाद प्रस्तावित की गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो सहकारी समितियों पर 22062 मीट्रिक टन यूरिया, 2838 मीट्रिक टन डीएपी, 12991 मीट्रिक टन एनपीके, 1954 मीट्रिक टन पोटाश और 3019 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट उपलब्ध करा दी गई है। 

जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। कहीं यूरिया नहीं है तो कहीं डीएपी की किल्लत बनी हुई है। कई केंद्रों से एनपीके गायब है। जिन किसानों को खाद की जरूरत है, उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है। अभी से हालात यह हैं कि किसानों को निजी विक्रेताओं से खाद खरीदनी पड़ रही है। 

मीरगंज में डीएपी और एनपीके की किल्लत 
मीरगंज कस्बे के इफको खाद विक्रय केंद्र पर डीएपी और एनपीके ही नहीं है। यहां मिले महेंद्र सिंह ने बताया कि विक्रय केंद्र पर 450 बोरी यूरिया है, लेकिन डीएपी और एनपीके नहीं है। धान की कटाई के बाद खाद की बिक्री शुरू हो जाएगी। इसके लिए डिमांड भेज दी गई है। नौरंगाबाद के पूर्व प्रधान मनोहर लाल शर्मा और बसई के प्रधान सतीश चंद्र गंगवार ने बताया कि अगर अभी से खाद के इंतजाम नहीं होंगे तो आगे दिक्कत बढ़ेगी।

जिंक लेने का दबाव बनाते हैं विक्रेता
आंवला में डीएपी की कालाबाजारी के लिए बदनाम क्षेत्र में ज्यादातर समितियों पर खाद की किल्लत है। किसान चौधरी सतेंद्र सिंह का ने बताया कि वह समिति के सदस्य हैं, बावजूद अब तक खाद नहीं मिली। ऐसे किसान जो समितियों से जुड़े नहीं हैं उनका हाल और बुरा है। निजी विक्रेताओं के पास जाने पर वह जिंक सहित अन्य उत्पाद लेने का दबाव बनाते हैं। मना करने पर खाद देने के लिए ही तैयार नहीं होते। 

इफको ई-बाजार में खाद नहीं 
फरीदपुर में इफको ई-बाजार में डीएपी और एनपीके ही नहीं है। धान के बाद अब गेहूं के लिए उर्वरक खरीदने के लिए किसान निजी विक्रेताओं पर निर्भर है। ई-बाजार के इंचार्ज अजय भारद्वाज ने बताया कि डीएपी और एनपीके की ऊपर से ही आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वह कई बार इसकी डिमांड भेज चुके हैं। 

नौरंगाबाद निवासी रमेश चंद्र दिवाकर ने बताया कि 15 दिन में ही ज्यादातर जगह रबी फसलों की बोआई शुरू हो जाएगी। अब तक खाद उपलब्ध नहीं कराई गई है। सीजन के पीक पर खाद आती भी है तो खरीदने के लिए लाइन लगानी पड़ेगी। 
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मीरगंज के चौधरी सतेंद्र सिंह ने कहा कि क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में किसान परेशान हैं। डीएपी और एनपीके तो कहीं है ही नहीं। डीएपी की सबसे ज्यादा कालाबाजारी हो रही है। आम किसानों के लिए यह मिल ही नहीं पा रही। 

गुलड़िया धीमर के जितेंद्र कुमार ने कहा कि आने वाले दिनों में मांग में और तेजी आएगी। उस दौरान ऐसे ही हालात रहे तो किसानों को दिक्कतें आएंगी। बोआई में देरी होने पर उत्पादन प्रभावित होता है।

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चाहरपुर के गुड्डू मौर्य ने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से खाद की किल्लत बनी हुई है। जरूरत के समय समितियों पर खाद मिलती ही नहीं है। 15 दिनों में रबी की फसलों की बोआई शुरू हो जाएगी, तब परेशानी और बढ़ेगी। 

एआर कोऑपरेटिव ब्रजेश सिंह परिहार ने बताया कि जिले में 142 समितियां हैं। प्रत्येक समिति पर 25-25 टन खाद भेजी जा रही है। किसानों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
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