अपनी जान बचाते हुए दरवाजा खोलकर बाहर कूद गया। छात्र मोहन गुप्ता ने बताया कि मुख्य सड़क पर कुछ दूरी पर चलते ही वैन अचानक से लहराई और दो बार पलटने के बाद सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग दौड़ पड़े। घायल ज्योति ने बताया कि पहले पेपर वाले दिन भी कार एक बार टकराते बची थी। माना जा रहा है कि रात में शराब पीने और सुबह जल्दी उठने के कारण ड्राइवर पूरी सजगता से गाड़ी नहीं चला पा रहा था। कांट इंस्पेक्टर दयाशंकर ने बताया कि चालक को चोटें आई हैं। उसे सीएचसी से राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है। उनका कहना है कि चालक ने रात में शराब पी होगी, जिसकी दुर्गंध सुबह तक आ रही होगी।
हादसे की कहानी, प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी
जरावन गांव के पास हुए हादसे का भयावह नजारा वहां से गुजर रहे लोगों ने देखा तो वे कांप गए। कुछ देर के लिए उन्हें समझ नहीं आया। परीक्षार्थियों की चीख-पुकार होने पर वह दौड़ पड़े।
100 से ऊपर की होगी रफ्तार
वैन बहुत तेज रफ्तार में थी। लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटा से ऊपर की गति होगी। ड्राइवर नशे की हालत में लग रहा था। गाड़ी पंक्चर होने के बाद वह गाड़ी से कूद गया था। पंक्चर होने के कारण उसने अचानक हैंडब्रेक लिया, जिसके चलते गाड़ी पलट गई। -अरशद, प्रत्यक्षदर्शी
पहले ट्रैक्टर चलाता था मुलायम
मुलायम पहले ट्रैक्टर चलाता था। वह अब वैन चलाने लगा था। उसे ठीक से गाड़ी चलानी नहीं आती है। वह तेज गति से गाड़ी चला रहा था। टायर पंक्चर होने के बाद गाड़ी सड़क किनारे खंती में गिरी और चीख-पुकार मच गई। -खालिद, प्रत्यक्षदर्शी
बिना फिटनेस के दौड़ रहे वाहन, नहीं हो रही कार्रवाई
जिले में लगातार हादसे होने के बाद भी परिवहन विभाग और यातायात पुलिस दिखावे के लिए कार्रवाई कर रही है। बिना फिटनेस के वाहन सड़कों पर दौड़कर हादसों को दावत दे रहे हैं। इसी के चलते हादसों में लोग अपनी जान गवां रहे हैं। रफ्तार की वजह से आए दिन हादसे होने पर परिवहन निगम कोई संज्ञान नहीं ले रहा है। हालांकि, इस मामले में एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय का कहना है कि वैन का मॉडल वर्ष 2020 है। गाड़ी की फिटनेस भी पूर्ण है। हादसा होने की वजह से जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी में पीडब्ल्यूडी के एई, परिवहन विभाग के आरआई और यातायात निरीक्षक शामिल हैं।
अनुभवहीन चालक की लापरवाही ने ले ली जान
विद्यालय का सेंटर जैतीपुर जाने पर कॉलेज के प्रधानाचार्य अनिल मिश्रा ने मुलायम सिंह की वैन को परीक्षार्थियों को लेकर जाने का जिम्मा दिया था। प्रत्येक छात्र से एक हजार रुपये लिए गए थे। मृतकों के परिजन बताते हैं कि मुलायम गांवों में वैन को चलाता था। मुख्य रोड पर गाड़ी कम लाता था। अनुभवहीन चालक को रुपयों के लालच में परीक्षार्थियाें को सौंप दिया गया।
अस्पताल में हंगामा, डॉक्टर से नोकझोंक
हादसे के बाद घायलों को राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में भेज दिया गया। हादसे के बाद घायलों के परिजन पहुंचे तो कोई उपचार नहीं होता देखकर भड़क गए। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। इस बीच डॉक्टर से नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने आकर मामले को संभालकर लोगों को शांत किया। डॉक्टर का कहना था कि पहले पर्चा बनवाएं, तब उपचार होगा। जबकि परिजन छात्रों के घायल होने पर उपचार करने पर जोर दे रहे थे।
कांट पुलिस के खिलाफ परिजन में रोष
चालक की लापरवाही की वजह से हादसा होने के बाद तमाम लोग पहुंच गए। चार बच्चों के शव को देखकर लोग भड़क गए। इस बीच पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को अस्पताल भेजने का प्रयास किया। इस पर कुछ लोगों ने विरोध किया। पुलिस ने किसी तरह उन्हें शांत किया। ग्रामीणों में पुलिस के खिलाफ नाराजगी थी।
डीएम समेत अन्य अफसर मौके पर पहुंचे
हादसे की सूचना के बाद डीएम उमेश प्रताप सिंह ने राजकीय मेडिकल कॉलेज में पहुंचकर घायलों से हालचाल जाना। उनके अतिरिक्त एडीएम प्रशासन संजय पांडेय, एसपी सिटी संजय कुमार, नगर मजिस्ट्रेट प्रवेंद्र कुमार, सीओ सदर अमित चौरसिया, सीएमओ डाॅ.आरके गौतम, सीएमएस डॉ.नेपाल सिंह आदि पहुंचे।