शहजिल की अग्रिम जमानत अर्जी पर अदालत में बहस के दौरान उनके वकील घनश्याम शर्मा ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता क्योंकि पुलिस ने जिस बयान का जिक्र किया है, वह किसी लोकस्थान पर नहीं दिया गया है। इसके अलावा एफआईआर में भी उन शब्दों का उल्लेख नहीं है जिनसे सौहार्द बिगड़ने की आशंका है। अभियुक्त की ओर से यह भी कहा गया कि राजनीतिक विद्वेष की वजह से उनका जायज पेट्रोल पंप भी बेवजह ध्वस्त कर दिया गया। अब उन्हें पूरी आशंका है कि द्वेष भावना की वजह से थाना बारादरी, सीबीगंज, प्रेमनगर और कोतवाली की पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है।
अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुनिति कुमार पाठक, एडीजीसी सचिन जायसवाल और विशेष लोक अभियोजक अचिंत द्विवेदी ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया गया कि थाने की रिपोर्ट में कहा गया है कि अभियुक्त प्रभावशाली व्यक्ति हैं और अग्रिम जमानत पाकर विवेचना में सहयोग नहीं करेगा। वह मुकदमा कायम होने के बाद से खुद को लगातार छिपाए हुए है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की आवश्यकता है लेकिन उसकी ओर से विवेचना में सहयोग नहीं किया जा रहा है।
अभियोजन की ओर से यह भी कहा गया है कि शहजिल इस्लाम का अपराध भी गंभीर प्रकृति का है, लिहाजा उसे किसी भी हालत में अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए। अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार वर्मा ने इस टिप्पणी के साथ जमानत अर्जी खारिज कर दी कि अर्जी मे दिए गए तथ्य जमानत दिए जाने के लिए पर्याप्त और संतुष्टिकारक नहीं हैं।