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अफसरों की चाकरी नहीं मूल नौकरी पर तैनात किए जाएं सफाई कर्मचारी

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पंचायती राज ग्रामीण क्षेत्र कर्मचारी संघ ने मंगलवार को बाइक रैली निकाल कर किया विरोध प्रदर्शन, क?
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बरेली। गांवों में सफाई व्यवस्था और सफाईकर्मियों की तैनाती के लिए सीधे-सीधे जिम्मेदार जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) खुद अपने ही कार्यालय में करीब दर्जन भर सफाईकर्मियों की सेवाओं लुत्फ उठा रहे हैं। गांवों में सफाई का काम छोड़कर करीब 15 कर्मचारी डीएम कार्यालय और आवास पर ड्यूटी करते हैं। इसी तरह जिले भर की ग्राम पंचायतों में तैनात सफाईकर्मियों में से करीब-करीब एक-चौथाई किसी न किसी अफसर के खादिम बने हुए हैं। उधर, गांवों को यह पता ही नहीं है कि वहां तैनात सफाईकर्मी आखिर क्यों ड्यूटी पर नहीं आते हैं।
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गांवों में गंदगी की कीमत पर अफसरों के बंगले और कार्यालय चमक रहे हैं। उनके घर में सब्जी-भाजी लाने जैसे घरेलू काम करने के लिए मुफ्त का नौकर मिला हुआ है। निजी गाड़ी के ड्राइवर की भी कमी पूरी हो रही है। गांवों में तैनात 50 से ज्यादा सफाई कर्मचारी निर्वाचन दफ्तर में चुनाव की तैयारी करा रहे हैं ताकि चुनाव जीतने वाले गांवों को साफ-स्वच्छ बनाने के दावे कर सकें। एसडीएम सदर, उपनिदेशक सांख्यिकी और डीआरडीए के पीडी की गाड़ी चला रहे जयप्रकाश मौर्य, हरेंद्र पटेल और नेमचंद का भी मूल पद सफाईकर्मी का है और उनकी तैनाती गांवों में है। कई सफाईकर्मी अफसरों के अर्दली बने हुए हैं ताकि उनकी लकदक बनी रहे।
जिले भर की ग्राम पंचायतों में तैनात सफाई कर्मियों की संख्या करीब 17 सौ है जिनमें से करीब चार सौ का दुरुपयोग खुद अफसर कर रहे हैं। पिछले साल सत्ताधारी पार्टी के एक नेता की गाड़ी भी एक सफाईकर्मी के चलाने का मामला सामने आया था। यह हाल तब है, जब गांवों में सफाई न होने की समस्या बार-बार उठती है। अफसर उल्टे सफाईकर्मियों को ही चेतावनी जारी करके छुट्टी कर देते हैं।
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गांवों में मलेरिया फैले या डेंगू
किसी को कोई परवाह नहीं
दो साल पहले जिले में मलेरिया का भीषण प्रकोप फैला था और सैकड़ों लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। तब भी मुद्दा उठा था कि तमाम सफाई कर्मी अफसरों की सेवा में लगे हुए हैं और दूसरी तरफ गांवों में सफाई न होने की वजह से भीषण गंदगी है और इसीलिए संक्रामक रोगों की रोकथाम नहीं हो पा रही है। हाल ही में डेंगू और बुखार के प्रकोप के दौरान एक बार फिर गांवों में गंदगी का मुद्दा उठा लेकिन अफसरों ने गांवों के सफाईकर्मियों को अपने चंगुल से मुक्त नहीं किया। समय-समय पर खुद सफाईकर्मी अफसरों के बंगलों पर काम कराए जाने का विरोध कर चुके हैं लेकिन उसका भी कोई नतीजा नहीं निकला।
सफाईकर्मी आते नहीं, ग्राम प्रधानों को
सुननी पड़ती हैं ग्रामीणों की खरीखोटी
हाल ही में अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में जिले के युवा ग्राम प्रधानों ने भी गांवों में सफाई की समस्या को सबसे ज्यादा अहम बताया था। ग्राम प्रधानों का कहना था कि गांवों में तैनात सफाई कर्मचारी कभी ड्यूटी पर नहीं आते, इसके बावजूद अफसरों के दबाव में उनका वेतन निकलवा लिया जाता है। वे लोग अफसरों से शिकायत करते-करते थक गए हैं लेकिन इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। उधर, गांव के लोग इस समस्या के लिए प्रधान को जिम्मेदार मानते हैं और उन्हें आड़े हाथों भी ले लेते हैं।
अब सफाईकर्मियों ने भी खोला मोर्चा
कहा- नहीं करेंगे अफसरों की चाकरी
उप्र पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ ने निकाली बाइक रैली, कलक्ट्रेट में दिया ज्ञापन
बरेली। कागजों में गांवों में तैनात सफाईकर्मियों से जबरन चाकरी कराने का आरोप लगाते हुए उप्र पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ ने भी अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को सैकड़ों सफाईकर्मियों ने शहर में बाइक रैली निकाली और सिस्टम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट जाकर ज्ञापन दिया। उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली और पदोन्नति की भी मांग की। बाइक रैली की वजह से शहर में कई जगह जाम लग गया।
रैली के लिए सुबह दस बजे जिलेभर से आए सफाई कर्मचारी विकास भवन के पीछे खाली मैदान में इकट्ठे हुए। दोपहर 12 बजे तक उनकी संख्या 500 को पार कर गई। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। ग्राउंड में ही कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी करने के बाद कलक्ट्रेट तक बाइक रैली निकाली और वहां सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली और पदोन्नति के साथ उन्हें ग्राम प्रधानों के नियंत्रण से भी मुक्त करने की मांग की।
बातचीत:
बार-बार मांग की जाती है कि सफाई कर्मचारियों से उनका मूल काम ही कराया जाए लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर कर्मचारी अफसरों ने अपने बंगलों और कार्यालयों में लगा रखे हैं। इसी वजह से अफसर हमारी इस मांग पर सुनवाई नहीं कर रहे। - रवींद्र कश्यप, सफाईकर्मी
पेंशन और पदोन्नति के साथ कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर भेजने के लिए लंबे समय से मांग की जा रही है। अब तक इन मांगों पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई है। सफाई कर्मचारियों को मूल पदों पर भेजने का काम जिलास्तर पर ही हो सकता है मगर अफसर सुन ही नहीं रहे हैं। - रामलाल कश्यप, सफाईकर्मी
सफाई कर्मचारियों को ग्राम प्रधानों के नियंत्रण से मुक्त किया जाए। इसके साथ ही विभागीय सेवा नियमावली भी बनाई जाए। नियमावली न होने से सफाई कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। - रामेश्वरदयाल साहू, सफाईकर्मी
प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया है। अगर जल्द ही समस्याओं का स्थायी निराकरण नहीं किया गया तो सफाई कर्मचारी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। - राजेश वाल्मीकि, सफाईकर्मी
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