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रुविवि: व्यक्तिगत प्रवेश बंद होने से ओपन यूनिवर्सिटी की ओर बढ़ा युवाओं का रुझान

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बीए जैसे पाठ्यक्रमों के लिए भी मुक्त विश्वविद्यालय में ले रहे प्रवेश
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय (रुविवि) में व्यक्तिगत प्रवेश बंद होने के बाद युवाओं का रुझान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की तरफ बढ़ा है। बरेली कॉलेज में चल रहे इग्नू के अध्ययन केंद्र में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इस सत्र के लिए अभी तक 305 छात्रों ने पंजीकरण कराया है। हालांकि अभी 15 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया जारी रहेगी। वहीं पिछले साल 346 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था।
प्राइवेट हो या रेगुलर बीए जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रम अधिकांश विद्यार्थियों की पहली पसंद होती है। रुविवि की ओर से पिछले साल से व्यक्तिगत प्रवेश बंद कर दिए गए हैं। अब ऐसे विद्यार्थी जो नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो सकते थे, उनके सामने एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए इग्नू एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। इग्नू दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से विभिन्न यूजी और पीजी पाठ्यक्रम प्रदान करता है, जिससे विद्यार्थियों को घर बैठे पढ़ाई करने की सुविधा मिलती है। इसमें सबसे अधिक पिछले साल बीए में 145 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। वहीं, बीबीए में पांच, बीकॉम में छह, बीएससी में 12, सर्टिफिकेट में दो, डिप्लोमा में 13, एमए में 98, एमबीए में 32, पीजी डिप्लोमा में 24 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था।
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बरेली कॉलेज स्थित इग्नू केंद्र के समन्वयक प्रो. वंदना शर्मा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में प्रवेश संबंधी पूछताछ और फॉर्म भरने वाले विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है। विशेष रूप से उन विद्यार्थियों का रुझान ज्यादा है जो नौकरी करते हैं या किसी अन्य कारण से नियमित कॉलेज नहीं जा सकते। इग्नू में कई ऐसे पेशेवर और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं, जो विद्यार्थियों के कॅरिअर के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। संवाद
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रुविवि की ऑनलाइन कोर्स शुरू करने की योजना अधर में
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ऑनलाइन कोर्स शुरू करने की योजना अधर में लटकी हुई है। करीब चार महीने पहले घोषणा की गई थी कि विश्वविद्यालय व्यक्तिगत प्रवेश बंद होने से ऑनलाइन कोर्स शुरू किए जाएंगे, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम शुरू नहीं हुआ है। इससे लगभग 50,000 छात्र-छात्राएं मुश्किल में हैं। इनमें ज्यादातर कामकाजी लोग हैं जो घर बैठे पढ़ाई करना चाहते हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने प्राइवेट फॉर्म बंद करने और एक नया डिजिटल लर्निंग हब स्थापित करने का एलान किया था। मगर, ये सभी वादे अभी तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। समय बीतने के बाद भी नई व्यवस्था के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ऑनलाइन कोर्स शुरू होने में हो रही देरी से विद्यार्थियों में निराशा है, क्योंकि उनके भविष्य से जुड़ी योजनाएं अटक गईं हैं। विश्वविद्यालय के इस ढीले रवैये से छात्रों का धैर्य जवाब दे रहा है।
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