पक्षकारों ने पेश किया 22 साल के वेतन व अन्य देयों के तौर पर 270 करोड़ का दावा, प्रशासन को दस्तावेज सौंपे
बरेली। रबर फैक्टरी के पक्षकारों ने मंगलवार को प्रशासन को कंपनी पर अपने बकाया के दावे से संबंधित दस्तावेज सौंपे। पक्षकारों ने दावा किया कि 22 साल पहले फैक्टरी बंद जरूर की गई लेकिन बंदी की घोषणा नहीं की गई थी। कर्मचारियों के लिए सवेतन अवकाश घोषित किया गया था। इस कारण कंपनी पर कर्मचारियों के अब तक के वेतन का 270 करोड़ के बकाया की देनदारी बनती है। इस मामले में अब 17 सितंबर को कमिश्नर को बैठक करनी है जिसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
पिछले दिनों एडीएम एफआर मनोज पांडेय और श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पक्षकारों से अपने दावों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया था। एस एंड सी कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अशोक मिश्रा ने बताया कि रबर फैक्टरी के 944 कर्मचारियों की कंपनी पर करीब 270 करोड़ रुपये की देनदारी बनती है। मंगलवार को एडीएम एफआर को इस संबंध में सारे दस्तावेज सौंप दिए गए हैं। इस बकाया में वेतन के साथ पीएफ, बोनस समेत कई देनदारियां शामिल हैं। एडीएम ने 17 को होने वाली बैठक के बाद आगे कार्रवाई को कहा है।
अशोक मिश्रा ने बताया कि कंपनी की ओर से कर्मचारियों को सवेतन अवकाश पर भेजे जाने के करीब दो साल पहले से बोनस और ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया गया था। इसलिए अब उसके भुगतान का दावा भी किया गया है और इसके समर्थन में अभिलेख दिए हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का करीब 270 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान किया जाना है। विरोधी पक्ष को भी इस धनराशि पर सहमत किए जाने का प्रयास चल रहा है।
पक्षकारों के तर्क
- 1- कारखाने का स्टेटस लाइव है। आज तक कारखाना न बंद है न क्लोजर है। सभी कर्मचारी सवेतन अवकाश पर चल रहे हैं।
- 2- 15 जुलाई 1999 को बी शिफ्ट में कर्मचारियों को सवेतन अवकाश पर भेजा गया। प्रत्येक 15 दिन बाद इस संबंध में नोटिस जारी किए गए।
- 3- हाईकोर्ट ने माना कि कर्मचारी सवेतन अवकाश पर हैं। इसी आधार पर वेतन भुगतान के लिए श्रम विभाग को आरसी जारी करने का आदेश मिला।
- 4- साल 2001 तक वेतन भुगतान पर आरसी टाइमली एंड वेजेज एक्ट के तहत श्रम विभाग द्वारा जारी भी की गई थी।
- 5- आदेशानुसार 944 कर्मचारियों के वेतन भुगतान डे ऑफ रिटायरमेंट तक के क्लेम में पिछले दो साल का बोनस, ग्रेच्युटी जोड़कर बनाया गया है।
- 6- इसी क्रम में शेष बचे सुपरवाइजरों के भी क्लेम बनाकर 270 करोड़ की देय भुगतानों को बनाकर उसके भुगतान की मांग है जो वाजिब है।