बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश से हुई फजीहत पर जवाब तलाश रहे अफसर
बरेली। रबर फैक्टरी के मामले में शासन की ओर से प्रभावी पैरवी न होने के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। इसकी जानकारी अफसरों को मंगलवार को हुई तो आनन-फानन बुधवार शाम वर्चुअल बैठक बुलाई गई, मगर अब अफसर इस मामले पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन की ओर से हुई इस चूक पर केंद्रीय मंत्री ने भी नाराजगी जाहिर की है।
बता दें कि करीब 21 सालों से बंद पड़ी रबर फैक्टरी भूमि पर प्रदेश सरकार की ओर से औद्योगिक गतिविधियां शुरू करने की कवायद शुरू हुई थी। करीब तीन माह पहले शासन ने वैधानिक कब्जा लेने के लिए पुनर्प्रवेश और स्वामित्व प्रक्रिया शुरू कराई थी। शासन ने पैरवी के लिए विशेष सचिव को नोडल अफसर भी नामित किया था। फिर भी इस बाबत कोई ठोस पहल न होने से बॉम्बे हाईकोर्ट ने सालों से लंबित वाद का निस्तारण कर दिया। जिसके तहत फैक्टरी की 1380.13 एकड़ भूमि और अन्य संपत्ति आदि वादी अलकेमिस्ट असेस्ट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपने के आदेश दिए हैं। इसी मुद्दे पर मंथन के लिए बुधवार को कमिश्नर ने एडीएम एफआर और अन्य अफसरों के साथ वर्चुअल बैठक की। हालांकि, वह इस पर साफ-साफ कुछ कहने से बच रहे हैं। अफसरों के फोन लगातार बजते रहे मगर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। अफसरों की खामोशी और यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।